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ऑपरेटर्स की मनमानी: नेशनल परमिट बसों में फ्लाइट जैसा सिस्टम, आधे घंटे में बदल रहा किराया

📑 इस लेख मेंरायपुर समेत छत्तीसगढ़ में नेशनल परमिट बसों का किराया आधे घंटे में बदल रहा है, एक ही रूट पर यात्रियों से 300 रुपये तक ज्यादा…

📅 23 December 2025, 10:49 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर समेत छत्तीसगढ़ में नेशनल परमिट बसों का किराया आधे घंटे में बदल रहा है, एक ही रूट पर यात्रियों से 300 रुपये तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नेशनल परमिट बस ऑपरेटर्स की मनमानी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। बस किराए तय मानकों से हटकर अब फ्लाइट टिकट की तरह डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम पर चलने लगे हैं। हालात यह हैं कि आधे घंटे के अंतर में ही किराया बदल रहा है, और एक ही रूट पर यात्रियों से 300 रुपये तक का फर्क वसूला जा रहा है।

यात्रियों का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित और शोषणकारी हो चुकी है, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।


एक ही बस, एक ही रूट… फिर भी अलग-अलग किराया

रायपुर से नागपुर, हैदराबाद, पुणे, इंदौर और मुंबई जैसे रूटों पर चलने वाली नेशनल परमिट बसों में किराए की स्थिति बेहद चौंकाने वाली है।
यात्री बता रहे हैं कि—

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वास्तु शास्त्र के प्रामाणिक उपाय

  • सुबह टिकट लेने पर किराया कम
  • दोपहर या शाम को वही सीट 200–300 रुपये महंगी
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन किराए में भी भारी अंतर

कई मामलों में एक ही बस में अगली सीट का किराया अलग बताया जा रहा है।


फ्लाइट जैसा किराया, लेकिन सुविधाएं नहीं

यात्रियों का कहना है कि बस ऑपरेटर्स फ्लाइट की तरह किराया तो वसूल रहे हैं, लेकिन सुविधाएं उतनी नहीं मिल रही।

  • बसों में सीटें खराब
  • एसी ठीक से काम नहीं करता
  • समय पर बस नहीं चलती
  • सुरक्षा और सफाई के हालात कमजोर

इसके बावजूद त्योहार, वीकेंड या ज्यादा मांग के समय किराया अचानक बढ़ा दिया जाता है।


ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म भी बने वजह

विशेषज्ञों के अनुसार किराया बढ़ने के पीछे ऑनलाइन बस बुकिंग प्लेटफॉर्म भी बड़ी वजह हैं। ये प्लेटफॉर्म—

  • डिमांड बढ़ते ही किराया ऑटोमैटिक बढ़ा देते हैं
  • अंतिम समय की बुकिंग पर ज्यादा पैसे वसूलते हैं
  • यात्रियों को किराया नियंत्रण की जानकारी नहीं देते

इसका सीधा नुकसान आम यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।


यात्रियों में भारी नाराजगी

रायपुर बस स्टैंड पर मिले यात्रियों ने बताया कि—

“हम रोज यात्रा करते हैं, लेकिन अब किराया समझ से बाहर हो गया है। कभी 800, कभी 1100 रुपये। कोई तय नियम ही नहीं है।”

एक अन्य यात्री ने कहा—

“सरकार ने बस किराया तय कर रखा है, फिर भी ऑपरेटर्स मनमानी कर रहे हैं।”


परिवहन विभाग की निगरानी पर सवाल

नेशनल परमिट बसों के किराए पर परिवहन विभाग की निगरानी सवालों के घेरे में है। नियमों के अनुसार—

  • बसों को निर्धारित किराया सूची प्रदर्शित करनी होती है
  • मनमाना किराया वसूलना नियम विरुद्ध है

लेकिन जमीनी हकीकत में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा।


त्योहार और वीकेंड पर सबसे ज्यादा असर

दीपावली, छठ पूजा, क्रिसमस, नए साल और लंबे वीकेंड के दौरान किराया अचानक 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। मजबूरी में यात्रियों को महंगा टिकट लेना पड़ता है।


क्या कहता है परिवहन नियम?

परिवहन नियमों के अनुसार नेशनल परमिट बसों को—

  • तय दर से अधिक किराया नहीं लेना चाहिए
  • किराया सूची सार्वजनिक करनी चाहिए
  • शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए

लेकिन यात्रियों की शिकायत है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है।


समाधान की जरूरत

यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—

  • बस किराए पर सख्त नियंत्रण हो
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़े
  • किराया सूची अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए
  • शिकायत के लिए हेल्पलाइन सक्रिय की जाए

निष्कर्ष

नेशनल परमिट बसों में किराए की अराजकता आम यात्रियों की जेब पर सीधा हमला है। जब तक परिवहन विभाग सख्ती नहीं दिखाएगा, तब तक ऑपरेटर्स की यह मनमानी यूं ही जारी रहेगी। जरूरत है पारदर्शी और यात्रीहित में सख्त व्यवस्था लागू करने की।

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