कुपोषण मिटाने वाले ‘पोषण’ में ही भ्रष्टाचार के आरोप, व्यवस्था पर उठे सवाल

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रायपुर में कुपोषण मिटाने के लिए चल रही पोषण योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। अनियमितताओं से योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल उठे।


कुपोषण दूर करने की योजना पर सवाल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित कई क्षेत्रों में कुपोषण दूर करने के लिए चलाई जा रही पोषण योजनाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने लगे हैं। जिन योजनाओं का उद्देश्य बच्चों और महिलाओं को पोषण उपलब्ध कराना है, उन्हीं में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर कई मामलों में यह आरोप लगाया गया है कि पोषण सामग्री की आपूर्ति, वितरण और रिकॉर्ड में गड़बड़ी हो रही है। इससे जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

बच्चों और महिलाओं के लिए चल रही योजनाएं

कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है।

इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर बनाना और माताओं के स्वास्थ्य को मजबूत करना है। लेकिन यदि इन योजनाओं में पारदर्शिता नहीं रहेगी तो उनका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।

अनियमितताओं के आरोप

कुछ क्षेत्रों से यह शिकायतें सामने आई हैं कि पोषण आहार की गुणवत्ता और मात्रा में कमी की जा रही है। वहीं रिकॉर्ड में अलग और वास्तविक वितरण में अलग स्थिति होने की बात भी कही जा रही है।

ऐसे आरोप सामने आने के बाद संबंधित विभागों से जांच की मांग भी उठने लगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो कुपोषण से लड़ने की पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।

पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए पारदर्शिता और सख्त निगरानी जरूरी है। यदि वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

इसलिए नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता जांच और जवाबदेही तय करना बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

कुपोषण से लड़ाई में बाधा

छत्तीसगढ़ में कुपोषण की समस्या पहले से ही एक बड़ी चुनौती रही है। सरकार और विभिन्न संस्थाएं मिलकर इसे कम करने के लिए प्रयास कर रही हैं।

ऐसे में यदि पोषण योजनाओं में ही भ्रष्टाचार या लापरवाही सामने आती है तो यह कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को कमजोर कर सकती है।

सख्त कार्रवाई की उठी मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पोषण योजनाओं में होने वाली अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए तो कुपोषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।

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