रक्शापथरा के जंगल से एके-47 और 12 बोर हथियार बरामद, नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका
📑 इस लेख मेंगरियाबंद के रक्शापथरा जंगल से पुलिस ने एके-47 और 12 बोर हथियार बरामद किए, नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता।आत्मसमर्पित माओवादियों की सूचना से मिली…
गरियाबंद के रक्शापथरा जंगल से पुलिस ने एके-47 और 12 बोर हथियार बरामद किए, नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता।
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित गरियाबंद जिले में पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना शोभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रक्शापथरा के दुर्गम जंगलों से एके-47 राइफल और 12 बोर हथियार की बरामदगी ने सुरक्षा बलों की सतर्कता और सटीक रणनीति को एक बार फिर साबित कर दिया है।
यह कार्रवाई उन माओवादियों से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिन्होंने हाल ही में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह हथियार डीजीएन डिवीजन के नक्सलियों द्वारा भविष्य की बड़ी वारदातों के लिए डम्प कर रखे गए थे।
आत्मसमर्पित माओवादियों की सूचना से मिली बड़ी कामयाबी
19 जनवरी 2026 को गरियाबंद में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ के दौरान यह अहम जानकारी सामने आई थी कि रक्शापथरा के जंगल क्षेत्र में नक्सलियों ने हथियार छिपाकर रखे हैं।
सूचना की पुष्टि के बाद
20 जनवरी 2026 को जिला पुलिस बल की विशेष ऑप्स टीम ई-30 को मौके के लिए रवाना किया गया।
ई-30 टीम के साथ बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) भी तैनात किया गया, ताकि किसी भी प्रकार के विस्फोटक खतरे से निपटा जा सके।
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में चला सघन सर्च ऑपरेशन
रक्शापथरा गांव जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दक्षिण–पूर्व दिशा में स्थित है। यह क्षेत्र—
- घने जंगलों
- ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों
- और संकरी पगडंडियों
से घिरा हुआ है, जहां नक्सली लंबे समय से अपनी गतिविधियां संचालित करते रहे हैं।
संयुक्त सर्चिंग के दौरान
टीम को एक टेकरी के ऊपर चट्टान के किनारे नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियार मिले।
बरामद हथियारों का विवरण
पुलिस द्वारा मौके से—
- एक नग एके-47 राइफल
- एक खाली मैग्जीन
- एक नग 12 बोर हथियार
बरामद किया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये हथियार किसी बड़ी नक्सली वारदात की तैयारी के तहत जंगल में सुरक्षित स्थान पर छिपाकर रखे गए थे।
नक्सल नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
इस बरामदगी को नक्सल विरोधी अभियान में
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- हथियारों की जब्ती से
नक्सलियों की परिचालन क्षमता कमजोर होगी - भविष्य में संभावित हमलों को
समय रहते टाला जा सका - आत्मसमर्पण नीति की
प्रभावशीलता एक बार फिर साबित हुई
यह कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि
आत्मसमर्पित नक्सली अब सक्रिय रूप से पुलिस की मदद कर रहे हैं।
सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई जारी
गरियाबंद पुलिस का कहना है कि—
- जंगल क्षेत्रों में लगातार
सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है - शेष नक्सल नेटवर्क की
पहचान और सफाया प्राथमिकता है - आत्मसमर्पण के लिए
नक्सलियों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है
अधिकारियों के अनुसार,
इस तरह की कार्रवाइयों से
जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में तेज प्रगति हो रही है।
निष्कर्ष
रक्शापथरा के जंगल से एके-47 और 12 बोर हथियार की बरामदगी
गरियाबंद पुलिस की सटीक सूचना तंत्र और मजबूत रणनीति का प्रमाण है।
यह सफलता न केवल
नक्सलियों की हिंसक योजनाओं पर पानी फेरती है,
बल्कि यह भी दिखाती है कि
हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले नक्सली ही
शांति की सबसे बड़ी कड़ी बन सकते हैं।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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