सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट फेल: चार रंग डस्टबिन नियम टूटा
📑 इस लेख मेंरायपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट फेल, घरों में डस्टबिन नहीं बांटे, गाड़ियों में कंपार्टमेंट नहीं, चार रंग डस्टबिन नियम टूटता नजर आयाघरों तक नहीं पहुंचे…
रायपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट फेल, घरों में डस्टबिन नहीं बांटे, गाड़ियों में कंपार्टमेंट नहीं, चार रंग डस्टबिन नियम टूटता नजर आया
रायपुर। शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतरती नजर आ रही है। घर-घर कचरा अलग-अलग एकत्र करने के लिए चार रंग के डस्टबिन का नियम बनाया गया था, लेकिन न तो नागरिकों को डिब्बे वितरित किए गए और न ही कचरा उठाने वाली गाड़ियों में अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए गए। इसके चलते कचरा प्रबंधन की पूरी योजना कागजों तक सीमित रह गई है। 🗑️
नगर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चार रंग के डस्टबिन का सिस्टम लागू किया गया था। इसमें गीला, सूखा, प्लास्टिक और खतरनाक कचरे को अलग-अलग जमा करने का प्रावधान था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।
घरों तक नहीं पहुंचे डस्टबिन
रायपुर नगर निगम द्वारा चार रंग के डस्टबिन वितरण की योजना बनाई गई थी, लेकिन अधिकांश घरों में अभी तक डस्टबिन नहीं पहुंचे हैं। कई क्षेत्रों में नागरिकों को एक ही डिब्बे में कचरा डालने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
नागरिकों का कहना है कि बिना डस्टबिन दिए कचरा अलग-अलग रखने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। लोगों ने निगम प्रशासन से जल्द डस्टबिन वितरण की मांग की है।
कचरा गाड़ियों में नहीं बनाए कंपार्टमेंट
कचरा संग्रहण के लिए उपयोग की जा रही गाड़ियों में भी अलग-अलग कंपार्टमेंट नहीं बनाए गए हैं। ऐसे में नागरिकों द्वारा अलग-अलग रखा गया कचरा भी गाड़ियों में मिल जाता है। इससे कचरा पृथक्करण की पूरी व्यवस्था विफल हो रही है। 🚛
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक गाड़ियों में अलग कंपार्टमेंट नहीं बनाए जाएंगे, तब तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।
चार रंग डस्टबिन का नियम
चार रंग के डस्टबिन का उद्देश्य था:
- हरा डस्टबिन – गीला कचरा
- नीला डस्टबिन – सूखा कचरा
- लाल डस्टबिन – खतरनाक कचरा
- पीला डस्टबिन – प्लास्टिक कचरा
लेकिन वर्तमान में अधिकांश जगहों पर यह व्यवस्था लागू नहीं है।
स्वच्छता अभियान पर असर
स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा पृथक्करण को अनिवार्य किया गया था। लेकिन शहर में इसकी अनदेखी से स्वच्छता अभियान प्रभावित हो रहा है।
स्वच्छता विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कचरा स्रोत स्तर पर अलग नहीं किया गया तो प्रोसेसिंग प्लांट में भी परेशानी बढ़ेगी और कचरे का निस्तारण मुश्किल हो जाएगा।
नागरिकों में नाराजगी
शहर के कई वार्डों में नागरिकों ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि:
- डस्टबिन नहीं दिए गए
- गाड़ियों में अलग व्यवस्था नहीं
- नियमित कचरा उठान नहीं
इन समस्याओं से शहर में गंदगी बढ़ रही है।
प्रोसेसिंग पर भी असर
कचरा पृथक्करण नहीं होने से प्रोसेसिंग प्लांट पर भी दबाव बढ़ रहा है। गीला और सूखा कचरा एक साथ पहुंचने से रिसाइक्लिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ♻️
प्रशासन की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए:
- घर-घर डस्टबिन वितरण
- गाड़ियों में कंपार्टमेंट
- जागरूकता अभियान
- निगरानी व्यवस्था
जरूरी है।
शहर में बढ़ती समस्या
शहर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था कमजोर होने से स्वच्छता प्रभावित हो रही है। यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में समस्या और बढ़ सकती है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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