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ग्रीन इंडिया-क्लीन इंडिया: 7700 में 99% पौधे सूखे

📑 इस लेख मेंरायपुर में ग्रीन इंडिया अभियान के तहत लगाए 7700 पौधों में 99 प्रतिशत सूखे, रखरखाव की कमी और सिंचाई अभाव से हरियाली योजना विफलपौधारोपण अभियान…

📅 15 April 2026, 12:21 pm अपडेट: 16 May 2026
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Photo by Amit Rai on Pexels

रायपुर में ग्रीन इंडिया अभियान के तहत लगाए 7700 पौधों में 99 प्रतिशत सूखे, रखरखाव की कमी और सिंचाई अभाव से हरियाली योजना विफल

रायपुर। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से लगाए गए हजारों पौधे अब उपेक्षा का शिकार हो गए हैं। ग्रीन इंडिया-क्लीन इंडिया अभियान के तहत सीयू परिसर के 17 एकड़ क्षेत्र में लगाए गए 7700 पौधों में से 99 प्रतिशत पौधे नष्ट हो चुके हैं। इस स्थिति ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 🌱

जानकारी के अनुसार, कुछ वर्ष पहले बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाकर परिसर को हरित क्षेत्र बनाने की योजना बनाई गई थी। इस अभियान के तहत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे। लेकिन समय पर देखभाल और सिंचाई नहीं होने के कारण अधिकांश पौधे सूख गए।

पौधारोपण अभियान बना औपचारिकता

पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साह के साथ भाग लिया था। बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे और हरियाली बढ़ाने का दावा किया गया था। लेकिन पौधारोपण के बाद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधारोपण के बाद न तो नियमित सिंचाई की व्यवस्था की गई और न ही पौधों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। इससे अधिकांश पौधे कुछ ही महीनों में सूख गए।

17 एकड़ क्षेत्र में हरियाली की योजना

17 एकड़ क्षेत्र को ग्रीन ज़ोन बनाने के लिए विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे, जिनमें छायादार और फलदार पौधे शामिल थे। योजना के तहत:

  • पौधों की नियमित सिंचाई
  • घेराबंदी
  • निगरानी
  • रखरखाव

की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।

रखरखाव की कमी बनी मुख्य कारण

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पौधारोपण से अधिक महत्वपूर्ण पौधों का संरक्षण होता है। यदि पौधों की नियमित देखभाल नहीं की जाती, तो ऐसे अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। 🌳

स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि कई पौधों को पशुओं से बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी। इसके अलावा गर्मी के मौसम में पानी की कमी भी पौधों के सूखने का बड़ा कारण बनी।

पर्यावरण संरक्षण पर असर

ग्रीन इंडिया मिशन के तहत हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से इस तरह के पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन पौधों के नष्ट होने से अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पौधारोपण के साथ-साथ:

  • नियमित निगरानी
  • जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति
  • सिंचाई व्यवस्था
  • सुरक्षा

भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

जिम्मेदारी तय करने की मांग

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि लाखों रुपए खर्च कर लगाए गए पौधों का इस तरह नष्ट होना गंभीर लापरवाही है।

भविष्य में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य में पौधारोपण के दौरान:

  • स्थानीय प्रजातियों का चयन
  • ड्रिप सिंचाई व्यवस्था
  • सामुदायिक भागीदारी
  • नियमित निरीक्षण

को प्राथमिकता दी जाए।

हरियाली बढ़ाने की जरूरत

रायपुर में बढ़ते तापमान और प्रदूषण को देखते हुए हरियाली बढ़ाना बेहद जरूरी है। ऐसे में पौधारोपण अभियानों को प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। 🌍

यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरण संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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