सिस्टम फेल: इंसुलिन है पर किट नहीं, खतरे में पड़ी टाइप-1 मरीजों की जिंदगी
📑 इस लेख मेंरायपुर में टाइप-1 डायबिटीज मरीजों के लिए इंसुलिन उपलब्ध, लेकिन जांच किट की कमी से इलाज प्रभावित, मरीजों की जिंदगी खतरे में।मरीजों को हो रही…
रायपुर में टाइप-1 डायबिटीज मरीजों के लिए इंसुलिन उपलब्ध, लेकिन जांच किट की कमी से इलाज प्रभावित, मरीजों की जिंदगी खतरे में।
रायपुर। स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां टाइप‑1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। सरकारी अस्पतालों में इंसुलिन तो उपलब्ध है, लेकिन जरूरी जांच किट और ग्लूकोमीटर स्ट्रिप्स की कमी के कारण मरीजों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए नियमित शुगर मॉनिटरिंग बेहद जरूरी होती है। बिना जांच किट के इंसुलिन लेना मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों में चिंता बढ़ गई है। ⚠️
मरीजों को हो रही गंभीर परेशानी
टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को दिन में कई बार ब्लड शुगर जांच करनी होती है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में जांच किट उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी दुकानों से महंगी किट खरीदनी पड़ रही है।
कई मरीजों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और नियमित रूप से किट खरीद पाना संभव नहीं है। इससे इलाज प्रभावित हो रहा है।
डॉक्टरों ने जताई चिंता
डॉक्टरों के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज मरीजों के लिए इंसुलिन और मॉनिटरिंग दोनों जरूरी हैं। केवल इंसुलिन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर शुगर की जांच नहीं की गई तो मरीजों में गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें बेहोशी, किडनी और हार्ट संबंधी समस्याएं शामिल हैं। 🏥
बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
टाइप-1 डायबिटीज अक्सर बच्चों और युवाओं में होती है। ऐसे में किट की कमी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है।
अभिभावकों ने कहा कि बिना जांच के इंसुलिन देना जोखिम भरा है। इससे बच्चों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
निजी खरीद से बढ़ा आर्थिक बोझ
सरकारी अस्पतालों में किट उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी दुकानों से स्ट्रिप्स और ग्लूकोमीटर खरीदना पड़ रहा है।
एक मरीज के परिजन ने बताया कि हर महीने हजारों रुपए खर्च हो रहे हैं, जो आर्थिक रूप से मुश्किल है।
प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही किट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों ने कहा कि टाइप-1 मरीजों के लिए नियमित मॉनिटरिंग अनिवार्य है। मरीजों को बिना जांच इंसुलिन लेने से बचना चाहिए।
समाधान की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि इंसुलिन के साथ किट भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि मरीजों को पूरा इलाज मिल सके।
निष्कर्ष
इंसुलिन उपलब्ध होने के बावजूद जांच किट की कमी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय पर समाधान नहीं हुआ तो मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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