शर्तों पर पहले ही उठ चुके हैं सवाल: आबकारी मैनपावर टेंडर में खेल, एक मालिक की दो कंपनियों को काम
📑 इस लेख मेंआबकारी विभाग के मैनपावर टेंडर में एक मालिक की दो कंपनियों को काम मिलने पर सवाल, पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर उठी जांच की मांग।एक…
आबकारी विभाग के मैनपावर टेंडर में एक मालिक की दो कंपनियों को काम मिलने पर सवाल, पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर उठी जांच की मांग।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग से जुड़े मैनपावर टेंडर को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और एक ही मालिक से जुड़ी दो कंपनियों को काम दे दिया गया। इस मामले में अब शर्तों और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, आबकारी विभाग द्वारा जारी मैनपावर टेंडर में पहले ही कुछ शर्तों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। कई कंपनियों ने दावा किया था कि टेंडर की शर्तें कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई थीं। अब जब टेंडर का आवंटन हुआ है, तो आरोपों को और बल मिला है।
एक ही मालिक की दो कंपनियों को मिला काम
जानकारी के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया के बाद जिन कंपनियों को कार्य आवंटित किया गया है, उनमें दो कंपनियां एक ही मालिक से जुड़ी बताई जा रही हैं। इससे प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरोप है कि इससे अन्य कंपनियों को अवसर नहीं मिला और टेंडर प्रक्रिया का उद्देश्य प्रभावित हुआ। कुछ कंपनियों ने इस मामले में जांच की मांग भी उठाई है।
पहले भी उठे थे सवाल
टेंडर जारी होने के दौरान ही कई आवेदकों ने शर्तों को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि कुछ तकनीकी शर्तें ऐसी थीं, जिन्हें सीमित कंपनियां ही पूरा कर सकती थीं। हालांकि विभाग ने उस समय सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।
अब टेंडर आवंटन के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
विभाग की सफाई
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत की गई है। सभी पात्र कंपनियों को आवेदन का मौका दिया गया था और तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन के बाद ही निर्णय लिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी को आपत्ति है, तो वे नियमानुसार शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
मामले को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यदि एक ही मालिक की दो कंपनियों को काम दिया गया है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
मैनपावर टेंडर का महत्व
आबकारी विभाग का मैनपावर टेंडर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके तहत शराब दुकानों और संबंधित कार्यों के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। ऐसे में इस टेंडर का वित्तीय दायरा भी बड़ा होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के टेंडर में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि सरकारी कार्यों में निष्पक्षता बनी रहे।
जांच की मांग तेज
अब इस मामले में जांच की मांग तेज हो गई है। कई संगठनों और कंपनियों ने उच्च स्तर पर जांच कराने की मांग की है। यदि जांच होती है, तो टेंडर प्रक्रिया की पूरी जानकारी सामने आ सकती है।
निष्कर्ष
आबकारी विभाग के मैनपावर टेंडर को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या जांच कराई जाती है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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