डायल-112 सेवा में बड़ा घोटाला सामने आया, राजस्थान में कम दर पर काम करने वाली GVK कंपनी को छत्तीसगढ़ में दोगुने रेट पर ठेका, 150 करोड़ का बोझ।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की आपातकालीन सेवा डायल-112 को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि जिस GVK कंपनी को राजस्थान में कम दरों पर डायल-112 सेवा संचालन का कार्य सौंपा गया, उसी कंपनी को छत्तीसगढ़ में लगभग दोगुने रेट पर काम दिया गया। इस कथित अनियमितता के कारण राज्य सरकार पर करीब 150 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है।
जानकारी के अनुसार, डायल-112 सेवा पुलिस, एंबुलेंस और फायर जैसी आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत रूप से संचालित करने की योजना है। इसका उद्देश्य संकट के समय नागरिकों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराना है। लेकिन अब इस महत्वाकांक्षी योजना पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, GVK कंपनी राजस्थान में डायल-112 सेवा का संचालन जिस दर पर कर रही है, उसकी तुलना में छत्तीसगढ़ में उसे कहीं अधिक भुगतान किया जा रहा है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और प्रतिस्पर्धी कंपनियों को दरकिनार कर एक ही कंपनी को फायदा पहुंचाया गया।
विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि जब एक ही कंपनी कम लागत में दूसरे राज्य में सेवा दे सकती है, तो छत्तीसगढ़ में दोगुना भुगतान किस आधार पर किया गया। विपक्ष ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि डायल-112 सेवा के लिए वाहनों की खरीद, कॉल सेंटर संचालन, मानव संसाधन और तकनीकी सेवाओं के नाम पर लागत को अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया। इसी वजह से सरकारी खजाने पर लगभग 150 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया है और फाइलों की जांच शुरू कर दी गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सेवा-आधारित घोटालों में से एक माना जाएगा।
सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर औपचारिक बयान सीमित रहा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है। वहीं, नागरिक संगठनों ने भी डायल-112 जैसी संवेदनशील सेवा में भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी होगी, बल्कि जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ेगा। डायल-112 जैसी आपातकालीन सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस कथित घोटाले पर क्या कदम उठाती है और क्या वास्तव में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
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