रायपुर। यशराज ठाकुर ने सैकड़ों युवाओं संग शिवसेना (शिंदे गुट) की सदस्यता ली।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला जब पूर्व शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) युवासेना रायपुर महानगर अध्यक्ष यशराज ठाकुर ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ शिवसेना (शिंदे गुट) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उनका समर्थन हमेशा बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के प्रति रहा है, और इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया है।

बालासाहेब की विचारधारा से भटक गया उद्धव गुट
यशराज ठाकुर ने उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि शिवसेना को हमने हमेशा बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्ववादी विचारधारा को देखकर जॉइन किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे के हाल के फैसले पूरी तरह से बालासाहेब के सिद्धांतों के विपरीत रहे। उन्होंने कहा,
“उद्धव जी ने सत्ता मोह में कांग्रेस और अन्य हिंदू विरोधी पार्टियों से गठबंधन किया, जो बालासाहेब की सोच के खिलाफ था। अगर साहेब आज हमारे बीच होते, तो वे कभी इस प्रकार का गठबंधन स्वीकार नहीं करते।”
एकनाथ शिंदे को समर्थन
ठाकुर ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने हमेशा बालासाहेब के बताए मार्ग को अपनाया और उनकी हिंदुत्ववादी नीति को आगे बढ़ाया। यही कारण है कि वे और उनके समर्थक अब शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ हैं। उन्होंने शिंदे को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा,
“हम पूरी निष्ठा के साथ शिंदे साहब के नेतृत्व में काम करेंगे और हिंदुत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेंगे।”

छत्तीसगढ़ में हिंदुत्व की मजबूत आवाज: धनंजय सिंह परिहार
यशराज ठाकुर ने छत्तीसगढ़ में शिवसेना के प्रदेश प्रमुख “शेर-ए-छत्तीसगढ़” श्री धनंजय सिंह परिहार की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि परिहार जी पिछले 40-42 वर्षों से हिंदुत्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं और छत्तीसगढ़ की जनता के हित में लगातार कार्य कर रहे हैं।
“उनका हिंदुत्व के प्रति समर्पण अटूट है, और हम उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में हिंदू हितों के लिए काम करते रहेंगे।”
सैकड़ों युवाओं ने लिया शिवसेना (शिंदे गुट) की सदस्यता
इस मौके पर यशराज ठाकुर के साथ विशाल सोनी, सत्यम साहू, शुभांशु ठाकुर सहित सैकड़ों युवाओं ने शिवसेना (शिंदे गुट) की सदस्यता ली। सभी नए कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ में हिंदुत्व की रक्षा और बालासाहेब की विचारधारा को आगे बढ़ाने की शपथ ली।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) को राज्य में मजबूती मिलने की संभावना है, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है

