रायपुर में 14 साल बाद बेटे को पिता के खाते में 12 लाख मिले, बैंकों में 734 करोड़ बिना दावेदार रकम, लोगों को जागरूक रहने की सलाह
रायपुर। बैंकों में वर्षों से बिना दावेदार के पड़े करोड़ों रुपए का मामला एक बार फिर सामने आया है। रायपुर में एक व्यक्ति को 14 साल बाद यह पता चला कि उसके दिवंगत पिता के बैंक खाते में करीब 12 लाख रुपए जमा हैं। यह मामला सामने आने के बाद न केवल परिवार हैरान है, बल्कि बैंकों में पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
14 साल बाद मिली बड़ी जानकारी
जानकारी के अनुसार रायपुर निवासी युवक के पिता का निधन करीब 14 साल पहले हो गया था। उस समय परिवार को पिता के सभी बैंक खातों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई थी। हाल ही में जब युवक ने बैंक और वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी जुटानी शुरू की, तब उसे पता चला कि उसके पिता के नाम से एक बैंक खाते में लगभग 12 लाख रुपए जमा हैं।
यह जानकारी मिलने के बाद परिवार के सदस्य भी चौंक गए। युवक ने संबंधित बैंक से संपर्क किया और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया शुरू की। बैंक अधिकारियों ने भी दस्तावेजों की जांच के बाद रकम देने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
बैंकों में पड़े हैं 734 करोड़ रुपए
बताया जा रहा है कि रायपुर समेत प्रदेश के विभिन्न बैंकों में बड़ी मात्रा में ऐसी राशि पड़ी हुई है, जिनका लंबे समय से कोई दावेदार सामने नहीं आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 734 करोड़ रुपए ऐसे खातों में पड़े हैं, जो वर्षों से निष्क्रिय हैं या जिनके खाताधारकों ने कोई दावा नहीं किया है।
इन खातों में अक्सर ऐसे लोग शामिल होते हैं जिनका निधन हो चुका है या जिनके परिजनों को खातों की जानकारी नहीं होती। कई मामलों में खाते वर्षों तक निष्क्रिय रहते हैं और रकम बिना उपयोग के बैंक में पड़ी रहती है।
बैंक कर रहे जागरूकता अभियान
बैंक अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में परिवार के सदस्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं। खाताधारक के निधन की स्थिति में उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों के आधार पर राशि का दावा किया जा सकता है।
बैंक समय-समय पर ग्राहकों से अपने खातों की जानकारी अपडेट करने और परिवार के सदस्यों को खातों की जानकारी देने की अपील भी करते हैं, ताकि ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
आरबीआई के निर्देश
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे लंबे समय से निष्क्रिय खातों की जानकारी सार्वजनिक करें और ग्राहकों को जागरूक करें। इसके तहत कई बैंक वेबसाइट पर भी अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जहां ग्राहक अपने नाम या खाताधारक के नाम से खोज कर सकते हैं।
परिवारों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अपने बैंक खातों और निवेश की जानकारी परिवार के सदस्यों को जरूर देनी चाहिए। इसके अलावा खातों में नॉमिनी जोड़ना भी जरूरी है, जिससे भविष्य में राशि के दावे में परेशानी न हो।
बढ़ रही ऐसे मामलों की संख्या
हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों को वर्षों बाद अपने परिजनों के बैंक खातों में जमा रकम की जानकारी मिली। इससे यह भी साफ होता है कि बड़ी संख्या में रकम अभी भी बिना दावेदार के बैंकों में पड़ी हुई है।
फिलहाल रायपुर का यह मामला लोगों के लिए जागरूकता का संदेश बनकर सामने आया है। यदि लोगों को अपने परिजनों के खातों की जानकारी समय रहते मिल जाए, तो करोड़ों रुपए बिना उपयोग के बैंकों में पड़े रहने से बच सकते हैं। 💰

