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ये कैसी कमिश्नरी? स्वर्णभूमि, सफायर ग्रीन समेत दर्जनभर पॉश कॉलोनियां देहात का हिस्सा, 23 गांव पुलिस कमिश्नरी में शामिल

📑 इस लेख मेंरायपुर पुलिस कमिश्नरी में 23 गांव शामिल, लेकिन स्वर्णभूमि, सफायर ग्रीन जैसी पॉश कॉलोनियां अब भी ग्रामीण थाना क्षेत्र में, सीमाओं पर उठा सवाल।पॉश कॉलोनियां…

📅 23 January 2026, 11:39 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर पुलिस कमिश्नरी में 23 गांव शामिल, लेकिन स्वर्णभूमि, सफायर ग्रीन जैसी पॉश कॉलोनियां अब भी ग्रामीण थाना क्षेत्र में, सीमाओं पर उठा सवाल।

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद भी प्रशासनिक सीमाओं को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक ओर शहर की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पुलिस कमिश्नरी का गठन किया गया, वहीं दूसरी ओर स्वर्णभूमि, सफायर ग्रीन, सिल्वर ओक, ग्रीन वैली जैसी दर्जनभर पॉश कॉलोनियां आज भी देहात क्षेत्र का हिस्सा बनी हुई हैं

ताजा अधिसूचना के तहत पुलिस कमिश्नरी में 23 गांवों को शामिल किया गया है, लेकिन कई विकसित शहरी कॉलोनियां अब भी ग्रामीण थाना क्षेत्रों में ही दर्ज हैं। इस स्थिति ने नागरिकों, बिल्डरों और जनप्रतिनिधियों के बीच असमंजस और नाराजगी पैदा कर दी है।


पॉश कॉलोनियां अब भी ग्रामीण थाना क्षेत्र में

शहर के दक्षिण और पश्चिमी हिस्सों में विकसित—

  • स्वर्णभूमि
  • सफायर ग्रीन
  • ग्रीन सिटी
  • सिल्वर ओक
  • रॉयल गार्डन
  • ओम नगर

जैसी कॉलोनियां पूरी तरह शहरी स्वरूप में हैं। यहां मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट, मॉल, निजी स्कूल और बड़े अस्पताल मौजूद हैं, लेकिन इनके निवासी आज भी ग्रामीण थानों में शिकायत दर्ज कराने को मजबूर हैं

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि—

  • शहरी सुविधाएं मिल रही हैं
  • नगर निगम टैक्स वसूल रहा है
  • लेकिन पुलिसिंग आज भी देहात के ढांचे पर आधारित है

23 गांवों को कमिश्नरी में शामिल, पर सीमाएं विवादित

नई पुलिस कमिश्नरी में—

  • 23 गांवों को शामिल किया गया है
  • कई सीमावर्ती क्षेत्रों को शहरी थाना सीमा में लाया गया है
  • लेकिन कॉलोनी आधारित मैपिंग नहीं की गई

इस कारण एक ही सड़क के दोनों ओर अलग-अलग थाना क्षेत्र बन गए हैं। कहीं शहरी थाना, तो कुछ मीटर आगे ग्रामीण थाना का अधिकार क्षेत्र है।


शिकायत दर्ज कराने में हो रही परेशानी

नागरिकों के अनुसार—

  • ऑनलाइन एफआईआर में थाना चयन को लेकर भ्रम
  • महिला और साइबर अपराध मामलों में देरी
  • बीट पुलिस की नियमित गश्त नहीं
  • रिस्पॉन्स टाइम ग्रामीण थानों में अधिक

पॉश कॉलोनियों के रहवासियों का कहना है कि कमिश्नरी का उद्देश्य तेज और प्रभावी पुलिसिंग था, लेकिन वर्तमान सीमाएं उसी उद्देश्य को कमजोर कर रही हैं।


जनप्रतिनिधियों ने उठाया सवाल

कई पार्षदों और विधायक प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि—

  • यदि 23 गांवों को शामिल किया जा सकता है
  • तो विकसित शहरी कॉलोनियों को बाहर क्यों रखा गया?

उनका कहना है कि यह भौगोलिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंगति का मामला है।


पुलिस प्रशासन का पक्ष

पुलिस अधिकारियों के अनुसार—

  • सीमाओं का निर्धारण राजस्व और नगर निगम मैप के आधार पर किया गया
  • जल्द ही री-ड्रॉइंग ऑफ बाउंड्री पर विचार होगा
  • चरणबद्ध तरीके से शहरी विस्तार को कमिश्नरी में शामिल किया जाएगा

अधिकारियों ने माना कि कुछ कॉलोनियों को शामिल करना तकनीकी रूप से जरूरी है।


विशेषज्ञों की राय

शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि—

  • कॉलोनी आधारित पुलिस सीमा तय होनी चाहिए
  • जनसंख्या घनत्व और अपराध प्रवृत्ति को आधार बनाया जाए
  • केवल गांव-शहर की पुरानी रेखा से पुलिसिंग प्रभावी नहीं होगी

निष्कर्ष

रायपुर पुलिस कमिश्नरी की शुरुआत एक बड़ा सुधार कदम है, लेकिन मौजूदा सीमाएं इसके उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रही हैं। जब तक पॉश शहरी कॉलोनियों को भी कमिश्नरी सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक यह व्यवस्था अधूरी ही मानी जाएगी।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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