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दावा है- ‘शून्य’ हो जाएंगे नक्सली: लोगों की खामोशी बता रही कि डर खत्म करने की डेडलाइन अभी लंबी है

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म करने के दावे, लेकिन ग्रामीणों की खामोशी बता रही डर अभी बाकी, सुरक्षा और विकास के बीच भरोसा बनाना चुनौती।सरकार का…

📅 27 March 2026, 11:34 am अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म करने के दावे, लेकिन ग्रामीणों की खामोशी बता रही डर अभी बाकी, सुरक्षा और विकास के बीच भरोसा बनाना चुनौती।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के दावों के बीच जमीनी हकीकत अभी अलग तस्वीर पेश कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां भले ही नक्सलवाद को ‘शून्य’ करने की दिशा में तेजी से काम करने का दावा कर रही हों, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की खामोशी और सतर्कता यह संकेत दे रही है कि डर खत्म होने में अभी लंबा समय लग सकता है।

राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों, खासकर बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सल गतिविधियों में कमी जरूर आई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोगों के मन में भय पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्थानीय ग्रामीण खुले तौर पर नक्सलवाद के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं।

सरकार का दावा – जल्द खत्म होगा नक्सलवाद

राज्य और केंद्र सरकार की ओर से बार-बार यह दावा किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अंतिम चरण में है। सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और कई बड़े नक्सली मारे गए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के संयुक्त ऑपरेशन से कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। नए कैंप स्थापित किए गए हैं और सड़कों के निर्माण का कार्य भी तेज हुआ है।

जमीनी हकीकत अलग कहानी बता रही

हालांकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अभी भी सतर्क हैं। ग्रामीण खुलकर अपनी राय देने से बचते हैं और मीडिया से बातचीत में भी सावधानी बरतते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ी है, लेकिन दूरस्थ इलाकों में अभी भी नक्सलियों का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई गांवों में रात के समय गतिविधियों को लेकर लोगों में आशंका बनी रहती है।

विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ी

सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज किया है। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल और सड़क निर्माण से लोगों को राहत मिली है। इससे धीरे-धीरे स्थिति में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

आत्मसमर्पण कर रहे नक्सली

पिछले कुछ वर्षों में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या में वृद्धि से नक्सलवाद कमजोर हुआ है।

डर खत्म होने में समय लगेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद जैसी समस्या को खत्म करने में समय लगता है। केवल सुरक्षा कार्रवाई से नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से ही स्थायी समाधान संभव है।

ग्रामीणों का भरोसा जीतना और उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाना सबसे बड़ी चुनौती है।

लोगों की खामोशी दे रही संकेत

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की खामोशी इस बात का संकेत है कि वे अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। खुले तौर पर नक्सल विरोधी रुख अपनाने से पहले वे स्थिति का इंतजार कर रहे हैं।

आगे की रणनीति

सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब विकास और सुरक्षा के साथ-साथ जनसंपर्क अभियान पर भी जोर दे रही हैं। ग्रामीणों को जागरूक करने और विश्वास बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को ‘शून्य’ करने के दावे जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह बता रही है कि डर खत्म होने में अभी समय लगेगा। लोगों की खामोशी यह संकेत दे रही है कि विश्वास बहाली की प्रक्रिया अभी जारी है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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