नदी के बीच निजी रास्ता: 10 किमी दूरी घटाने और मिट्टी लाने के लिए बनाया गया अवैध एनीकट
📑 इस लेख मेंदुर्ग में निजी लाभ के लिए नदी के बीच अवैध एनीकट बनाकर रास्ता तैयार किया गया, जिससे 10 किमी दूरी घटी और पर्यावरण को नुकसान…
दुर्ग में निजी लाभ के लिए नदी के बीच अवैध एनीकट बनाकर रास्ता तैयार किया गया, जिससे 10 किमी दूरी घटी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।
दुर्ग। दुर्ग जिले में नदी के प्राकृतिक प्रवाह के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। निजी स्वार्थ के लिए नदी के बीच अवैध रूप से एनीकट बनाकर रास्ता तैयार किया गया, जिससे करीब 10 किलोमीटर की दूरी कम हो गई। इस अवैध निर्माण का उपयोग मिट्टी परिवहन और निजी आवाजाही के लिए किया जा रहा था। मामला सामने आने के बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग में हड़कंप मच गया है।
🌊 नदी के बीच बना निजी रास्ता
जानकारी के अनुसार, नदी के एक हिस्से में मिट्टी और मुरूम डालकर अस्थायी लेकिन मजबूत संरचना तैयार की गई। इसे स्थानीय लोग निजी रास्ते की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। इससे भारी वाहनों की आवाजाही संभव हो गई और नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध एनीकट के कारण पानी का बहाव बाधित हो रहा है और आसपास के खेतों में जलभराव की समस्या बढ़ गई है।
🚜 10 किलोमीटर दूरी घटाने के लिए किया गया निर्माण
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह एनीकट करीब 10 किमी का चक्कर बचाने के उद्देश्य से बनाया गया। साथ ही नदी से मिट्टी निकालकर अन्य निर्माण कार्यों में उपयोग करने के लिए इस रास्ते का सहारा लिया जा रहा था।
यह पूरा काम बिना किसी अनुमति, तकनीकी स्वीकृति या पर्यावरणीय मंजूरी के किया गया।
⚠️ पर्यावरण और जलस्रोत पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अवैध एनीकट से नदी के जलस्तर, जलधारा और जलीय जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। बारिश के मौसम में यह संरचना बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले मानसून में नदी का पानी खेतों और बस्तियों में घुस सकता है।
🏛️ प्रशासन की संज्ञान में आया मामला
ग्रामीणों की शिकायत के बाद राजस्व विभाग और जल संसाधन विभाग की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने माना कि यह निर्माण पूरी तरह अवैध है और संबंधित लोगों की पहचान की जा रही है।
प्रशासन ने मौके पर ही मिट्टी परिवहन रोकने के निर्देश दिए हैं और एनीकट को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
📜 नियमों का खुला उल्लंघन
नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण करने के लिए जल संसाधन विभाग, पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन की अनुमति अनिवार्य होती है। इसके बावजूद निजी लाभ के लिए नियमों को दरकिनार कर यह रास्ता बना दिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि दोषियों पर जुर्माना, एफआईआर और निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
👥 ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों ने इस अवैध एनीकट को तुरंत हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी सभी की है, किसी एक व्यक्ति या समूह की नहीं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
🔍 आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही जिले के अन्य नदी क्षेत्रों में भी अवैध निर्माण की जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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