जांच सिस्टम वेंटिलेटर पर, मरीज महीनों इंतजार
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एम्स रायपुर में सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए 6-8 महीने की वेटिंग, जांच में देरी से मरीज परेशान, निजी अस्पतालों का सहारा
रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में जांच सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जरूरी जांचों के लिए 6 से 8 महीने तक की लंबी वेटिंग चल रही है। इससे गंभीर मरीजों का समय पर इलाज प्रभावित हो रहा है और उन्हें निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
6 से 8 महीने की लंबी वेटिंग
एम्स रायपुर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन सीमित मशीनें और स्टाफ की कमी के कारण जांच समय पर नहीं हो पा रही है। मरीजों को सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए कई महीनों बाद की तारीख दी जा रही है।
मरीजों का कहना है कि डॉक्टर जांच कराने की सलाह देते हैं, लेकिन जब वे जांच काउंटर पर पहुंचते हैं तो उन्हें लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ता है। इससे बीमारी की गंभीरता बढ़ने का खतरा बना रहता है।
गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी
जांच में देरी का सबसे ज्यादा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच की जरूरत होती है, लेकिन लंबी प्रतीक्षा के कारण उनका इलाज प्रभावित हो रहा है।
कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में महंगी जांच करानी पड़ रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
प्रतिदिन बढ़ रही मरीजों की संख्या
एम्स रायपुर प्रदेश का प्रमुख सरकारी अस्पताल है, जहां छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बढ़ती मरीज संख्या के मुकाबले जांच सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।
अस्पताल में सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों की संख्या सीमित होने के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
डॉक्टरों ने जताई चिंता
अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि जांच में देरी से मरीजों के इलाज में बाधा आती है। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से इलाज की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है।
डॉक्टरों का मानना है कि जांच सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
निजी अस्पतालों की ओर रुख
सरकारी अस्पताल में लंबी वेटिंग के कारण मरीज निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। निजी अस्पतालों में जांच जल्दी हो जाती है, लेकिन वहां खर्च काफी ज्यादा होता है।
गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन हो गई है।
प्रशासन से समाधान की उम्मीद
मरीजों और उनके परिजनों ने जांच सुविधाओं को बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि नई मशीनें और अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की जाए।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण समस्या आ रही है और इसे दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
एम्स जैसे बड़े संस्थान में लंबी वेटिंग से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जांच सुविधाओं का विस्तार किया जाना जरूरी है।
यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है।
मरीजों को राहत की जरूरत
मरीजों को उम्मीद है कि जल्द ही नई मशीनों और स्टाफ की व्यवस्था की जाएगी। इससे जांच प्रक्रिया तेज होगी और मरीजों को राहत मिलेगी।
एम्स रायपुर में बढ़ती वेटिंग अब बड़ी चिंता का विषय बन गई है और मरीजों को तत्काल समाधान की जरूरत है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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