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एक लाख ई-बाइक, 6000 से अधिक कारें, चार्जिंग स्टेशन सिर्फ 290, जरूरत 5000 की

📑 इस लेख मेंरायपुर में 1 लाख ई-बाइक और 6000 ई-कारें हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन सिर्फ 290। विशेषज्ञों के अनुसार शहर को 5000 चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत।EV को…

📅 3 January 2026, 10:50 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर में 1 लाख ई-बाइक और 6000 ई-कारें हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन सिर्फ 290। विशेषज्ञों के अनुसार शहर को 5000 चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुपात में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद कमजोर साबित हो रहा है। शहर में वर्तमान में करीब 1 लाख इलेक्ट्रिक बाइक और 6000 से अधिक इलेक्ट्रिक कारें पंजीकृत हैं, जबकि इनके लिए सिर्फ 290 चार्जिंग स्टेशन ही उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा जरूरत को देखते हुए कम से कम 5000 चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता है।

EV को बढ़ावा, लेकिन सुविधा अधूरी

राज्य सरकार और नगर निगम द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी, टैक्स में छूट और पंजीयन में रियायत जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके चलते बीते कुछ वर्षों में ई-बाइक और ई-कारों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
हालांकि, चार्जिंग स्टेशन की धीमी रफ्तार से EV उपयोगकर्ताओं की परेशानी बढ़ती जा रही है

चार्जिंग के लिए लंबा इंतजार

ई-वाहन चालकों का कहना है कि—

  • कई चार्जिंग स्टेशन खराब पड़े हैं
  • कुछ स्थानों पर एक ही चार्जर पर कई वाहन निर्भर हैं
  • पीक आवर्स में घंटों इंतजार करना पड़ता है

कई बार बैटरी खत्म होने की स्थिति में वाहन चालकों को टोइंग या वैकल्पिक साधन का सहारा लेना पड़ता है

सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?

परिवहन विभाग के अनुसार—

  • रायपुर में लगभग 1,00,000 ई-बाइक
  • 6,000 से ज्यादा ई-कार
  • और लगातार बढ़ती EV रजिस्ट्रेशन संख्या

दर्ज की गई है। वहीं, चार्जिंग स्टेशन की संख्या अभी 290 के आसपास ही सीमित है, जिनमें सरकारी और निजी दोनों शामिल हैं।

विशेषज्ञों की राय

EV विशेषज्ञों का मानना है कि—

“यदि एक चार्जिंग स्टेशन पर औसतन 20 से 25 वाहन निर्भर रहें, तब भी रायपुर जैसे शहर में कम से कम 5000 चार्जिंग पॉइंट्स की जरूरत है।”

यदि समय रहते इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बढ़ाया गया, तो लोग फिर से पेट्रोल-डीजल वाहनों की ओर लौट सकते हैं, जिससे पर्यावरणीय लाभ प्रभावित होगा।

निजी निवेश की जरूरत

अभी चार्जिंग स्टेशन लगाने का अधिकांश दायित्व सरकार पर है। निजी कंपनियों और रेसिडेंशियल सोसाइटियों की भागीदारी सीमित है।
विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि—

  • मॉल
  • पार्किंग कॉम्प्लेक्स
  • हाउसिंग सोसाइटी
  • पेट्रोल पंप

पर चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य किए जाएं।

नगर निगम और सरकार की तैयारी

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में—

  • नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने
  • सार्वजनिक स्थानों पर फास्ट चार्जर लगाने
  • और PPP मॉडल पर निजी निवेश को प्रोत्साहित करने

की योजना है। हालांकि, इन योजनाओं की जमीनी गति फिलहाल धीमी नजर आ रही है।

EV यूजर्स में बढ़ती नाराजगी

ई-वाहन उपयोगकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने लोगों को EV खरीदने के लिए तो प्रेरित किया, लेकिन जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं।
एक ई-कार मालिक ने कहा—

“गाड़ी तो ले ली, लेकिन चार्जिंग की टेंशन हर समय बनी रहती है।”

पर्यावरण लक्ष्य पर भी असर

EV को बढ़ावा देने का मुख्य उद्देश्य—

  • प्रदूषण कम करना
  • कार्बन उत्सर्जन घटाना
  • और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना

है। लेकिन चार्जिंग स्टेशन की कमी इन लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती है।

निष्कर्ष

रायपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास उतनी ही तेजी से नहीं हो पा रहा। यदि जल्द ही चार्जिंग स्टेशनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो EV क्रांति की रफ्तार थम सकती है। सरकार, नगर निगम और निजी क्षेत्र को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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