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छत्तीसगढ़ में तिलहन फसलों में नया प्रयोग, रायपुर के किसान ऑयल पॉम का कर रहे रोपण

रायपुर के किसान ऑयल पॉम रोपण से तिलहन खेती में नया प्रयोग कर रहे हैं, जिससे आय बढ़ेगी, रोजगार मिलेगा और छत्तीसगढ़ में खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ावा…

📅 14 February 2026, 5:54 pm
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रायपुर के किसान ऑयल पॉम रोपण से तिलहन खेती में नया प्रयोग कर रहे हैं, जिससे आय बढ़ेगी, रोजगार मिलेगा और छत्तीसगढ़ में खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में खेती के स्वरूप को बदलने की दिशा में एक नया और महत्वपूर्ण प्रयोग शुरू हो गया है। अब पारंपरिक तिलहन फसलों के साथ-साथ किसान ऑयल पॉम (तेल पाम) की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। खास तौर पर रायपुर जिले के किसानों ने पहली बार बड़े पैमाने पर ऑयल पॉम के पौधों का रोपण शुरू किया है। यह पहल प्रदेश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन में चयनित किसानों के खेतों में पौधारोपण कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ऑयल पॉम की खेती से किसानों को पारंपरिक तिलहन की तुलना में अधिक उत्पादन और बेहतर आय मिलने की संभावना है। यह पहल छत्तीसगढ़ को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।


🏷️ तिलहन फसलों में हो रहा बड़ा बदलाव

अब तक छत्तीसगढ़ में सरसों, मूंगफली और तिल जैसी फसलें प्रमुख तिलहन फसलों के रूप में उगाई जाती रही हैं, लेकिन कम उत्पादन और सीमित लाभ के कारण किसानों की आय पर इसका अपेक्षित असर नहीं पड़ पा रहा था। इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने तेल पाम जैसी दीर्घकालिक और व्यावसायिक फसल को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।

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🏷️ रायपुर जिले से हुई नई शुरुआत

रायपुर जिले के चुनिंदा विकासखंडों में किसानों को ऑयल पॉम की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके लिए नर्सरी से उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शुरुआती चरण में दर्जनों किसानों ने अपने खेतों में रोपण कर इस नई खेती की शुरुआत कर दी है।


🏷️ किसानों को दिया जा रहा तकनीकी प्रशिक्षण

कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को ऑयल पॉम की खेती से जुड़ी संपूर्ण जानकारी दी जा रही है। रोपण की दूरी, खाद-उर्वरक प्रबंधन, जल प्रबंधन और रोग नियंत्रण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि किसान सही तकनीक से खेती कर सकें।


🏷️ लंबे समय तक मिलेगा उत्पादन का लाभ

ऑयल पॉम की खासियत यह है कि एक बार पौधा स्थापित हो जाने के बाद कई वर्षों तक लगातार फलन मिलता है। इससे किसानों को दीर्घकालिक और स्थायी आय का स्रोत मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह फसल 25 से 30 वर्षों तक उत्पादन देने में सक्षम होती है।


🏷️ खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति

देश में खाद्य तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा ऑयल पॉम को रणनीतिक फसल के रूप में अपनाया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता भी कम होगी।


🏷️ अनुदान और सरकारी सहायता का लाभ

ऑयल पॉम रोपण के लिए किसानों को पौधों की उपलब्धता, सिंचाई सुविधा और तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ अनुदान का भी लाभ दिया जा रहा है। इससे किसानों पर शुरुआती लागत का दबाव कम होगा और वे बिना जोखिम के नई फसल को अपना सकेंगे।


🏷️ रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

तेल पाम की खेती के विस्तार से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि नर्सरी, परिवहन, प्रोसेसिंग यूनिट और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


🏷️ प्रदेश के अन्य जिलों में भी होगा विस्तार

कृषि विभाग की योजना है कि रायपुर में सफल प्रयोग के बाद ऑयल पॉम की खेती को प्रदेश के अन्य उपयुक्त जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को तेलहन उत्पादन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।