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छत्तीसगढ़ के छह नगर निगमों में बायोगैस संयंत्र की स्थापना: 17 जनवरी को एमओयू पर हस्ताक्षर

📑 इस लेख मेंरायपुर। बायोगैस संयंत्र की स्थापनापरियोजना का उद्देश्य और लाभसंयंत्र स्थापना की योजनाकम्प्रेस्ड बायोगैस के महत्व पर जोरस्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावाग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में…

📅 17 January 2025, 1:35 am अपडेट: 16 May 2026
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बायोगैस संयंत्र की स्थापना

रायपुर। बायोगैस संयंत्र की स्थापना

छत्तीसगढ़ के छह नगर पालिका निगमों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से बायोगैस के उत्पादन के लिए कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 17 जनवरी को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ बायो फ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए), गेल इंडिया लिमिटेड (गेल), और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के बीच त्रिपक्षीय समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव उपस्थित रहेंगे।

परियोजना का उद्देश्य और लाभ

इस परियोजना के तहत अम्बिकापुर, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, राजनांदगांव, और धमतरी नगर निगम क्षेत्रों में कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन संयंत्रों में प्रतिदिन लगभग 350 मीट्रिक टन नगरीय ठोस अपशिष्ट और 500 मीट्रिक टन अधिशेष बायोमास का उपयोग करके लगभग 70 मीट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा।

इस परियोजना से राज्य को निम्नलिखित प्रमुख लाभ होंगे:

  1. निवेश और रोजगार:
    • गेल और बीपीसीएल द्वारा इन संयंत्रों में कुल 600 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
    • संयंत्रों के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख मानव दिवस रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  2. पर्यावरणीय सुधार:
    • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।
    • जैविक खाद के उत्पादन से राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।
    • पर्यावरण स्वच्छ और स्वास्थ्यकर बनेगा।

संयंत्र स्थापना की योजना

परियोजना के तहत, अम्बिकापुर, रायगढ़, और कोरबा में सीबीजी संयंत्रों की स्थापना के लिए संबंधित नगर निगम, सीबीडीए, और गेल इंडिया लिमिटेड के बीच समझौता होगा। वहीं, बिलासपुर, धमतरी, और राजनांदगांव में सीबीजी संयंत्र स्थापित करने के लिए नगर निगम, सीबीडीए, और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

कम्प्रेस्ड बायोगैस के महत्व पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस परियोजना को छत्तीसगढ़ में हरित ऊर्जा और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, “कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्र न केवल अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाएंगे, बल्कि हरित ऊर्जा के उत्पादन के माध्यम से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेंगे। इस परियोजना से राज्य के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।”

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना के माध्यम से नगरीय ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन करते हुए राज्य में जैविक खाद का उत्पादन किया जाएगा। इससे किसानों को कम लागत में उन्नत गुणवत्ता की खाद उपलब्ध होगी और जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, अधिशेष बायोमास के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी

संयंत्रों में बायोगैस उत्पादन प्रक्रिया के तहत ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित किया जाएगा। इससे पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस पहल को जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।

कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

इस ऐतिहासिक समझौते के दौरान मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के साथ नगर निगमों के अधिकारी, सीबीडीए, गेल, और बीपीसीएल के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। यह समझौता छत्तीसगढ़ के सतत विकास और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ में कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों की यह परियोजना न केवल हरित ऊर्जा उत्पादन का एक आदर्श मॉडल पेश करेगी, बल्कि राज्य को अपशिष्ट प्रबंधन, रोजगार सृजन, और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

गुरचरण सिंह होरा

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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