खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन में मनमानी: अभिभावकों में गहरा रोष
खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन में मनमानी और नियमों की अनदेखी का आरोप है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से नए सिरे से समिति के गठन की मांग की है, जिससे विवाद गहरा गया है।
खरोरा: भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री योजना के तहत संचालित खरोरा पीएम श्री स्कूल में शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन को लेकर गंभीर अनियमितताओं और मनमानी का आरोप सामने आया है। अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरा रोष व्याप्त है कि नियमों को ताक पर रखकर समिति का गठन किया गया है। पीएम श्री योजना का उद्देश्य स्कूलों को मॉडल के रूप में विकसित करना है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण होती है, लेकिन खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन में कथित मनमानी ने इस उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसएमसी गठन: नियम और मनमानी
भारत सरकार के निर्देशानुसार, राज्य के स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने विस्तृत गाइडलाइन जारी की थी। इन दिशानिर्देशों का स्पष्ट उद्देश्य यह था कि स्कूल की व्यवस्था देखने की जिम्मेदारी उन पालकों पर होगी जिनके बच्चे उन्हीं स्कूलों में पढ़ते हैं, और उन्हीं अभिभावकों की सर्वसम्मति से एसएमसी का गठन किया जाना चाहिए। हालांकि, खरोरा स्थित पीएम श्री भरत देवांगन शासकीय उत्कृष्ट हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में संस्था की प्राचार्य रजनी मिंज पर इन नियमों को अनदेखा कर मनमानी करने का आरोप लगा है। अभिभावकों का कहना है कि प्राचार्य ने पक्षपातपूर्ण तरीके से हिंदी माध्यम और अंग्रेजी माध्यम के लिए अलग-अलग अभिभावकों की बैठकें आयोजित कीं, जिसका स्पष्ट उद्देश्य अपने चहेते लोगों को समिति में शामिल करना था।
पक्षपातपूर्ण बैठकों का आरोप
अभिभावकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अंग्रेजी माध्यम के अभिभावकों का एसएमसी सदस्य चयन के लिए बैठक 23 जून 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें महिला एवं पुरुष सदस्यों की एक सूची प्राचार्य के निर्देशानुसार दी गई थी। उस समय इस सूची पर कोई आपत्ति नहीं की गई। लेकिन, इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि संस्था प्रमुख द्वारा उन्हीं सदस्यों की नियुक्ति के लिए 25 जून 2026 को फिर से बैठक आयोजित की गई, जो समझ से परे है। अभिभावकों का कहना है कि यदि 23 जून को पहली सूची पर कोई आपत्ति होती, तो उसे उसी समय खारिज किया जा सकता था। इस घटनाक्रम से यह साफ जाहिर होता है कि संस्था प्रमुख द्वारा ही खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन की पूरी प्रक्रिया अपनी मनमर्जी से की जा रही है, जिससे विवाद की स्थिति निर्मित हुई है।
अभिभावकों की आवाज़ हुई अनसुनी
मनमानी का एक और उदाहरण तब सामने आया जब प्राचार्य ने अपने नियमों के अनुसार अध्यक्ष का पद हिंदी माध्यम से और उपाध्यक्ष का पद अंग्रेजी माध्यम से बनाने की बात कही। इसका उद्देश्य अपने चहेते अभिभावकों को कक्षा शिक्षकों के माध्यम से सूचना देकर बैठक में बुलाना था। सूचना देने के लिए अभिभावकों की बैठक में निर्देश दिया गया था कि इच्छुक अभिभावक सदस्य बनने हेतु अपने नाम कक्षा के व्हाट्सप ग्रुप पर भेजकर दर्ज कराएं। लेकिन विडंबना यह है कि वह ग्रुप केवल एडमिनों के लिए ही मैसेज भेजने हेतु उपयुक्त था, जिससे सामान्य अभिभावक अपना नाम नहीं भेज सके। इसके बजाय, अपने ही लोगों को मोबाइल के माध्यम से सूचना देकर बुलाया गया। इस संबंध में संस्था प्रमुख से संपर्क करने पर, उन्होंने संतोषजनक जवाब न देते हुए एक-दूसरे शिक्षकों पर दोषारोपण करना शुरू कर दिया। हिंदी माध्यम एवं अंग्रेजी माध्यम एक ही परिसर में संचालित होते हैं, जिसमें लगभग 1500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन बैठक उपस्थिति रजिस्टर के अवलोकन से पता चलता है कि सूचना के अभाव में अभिभावकों की संख्या लगभग न के बराबर थी।
उच्च अधिकारियों तक पहुंची शिकायत
अभिभावक रमेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने एसएमसी के लिए अपना नाम सबसे पहले संस्था में दर्ज कराया था, लेकिन उनका नाम बैठक में सम्मिलित होने के लिए द्वेषपूर्ण तरीके से काटा गया था, और जवाब पूछने पर संस्था प्रमुख ने गोलमोल जवाब दिया, जिससे वहां विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी। अभिभावक दुष्यंत कुमार साहू, पंकज चौहान, हेमंत देवांगन, भानुप्रताप भट्ट एवं राजेंद्र निर्मलकर, रमेश शर्मा ने इसकी जानकारी पत्र के माध्यम से शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, कलेक्टर महोदय एवं जिला शिक्षा अधिकारी से शासन के नियमानुसार खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन नए सिरे से करने की मांग की है। इस संबंध में रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी सतीश नायर से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि पुरानी समिति को अभी भंग नहीं किया गया है और अभी पुरानी समिति ही कार्य करेगी। प्राचार्य खरोरा को इस प्रकार बैठक करने के लिए तत्काल रोकने की बात कही गई थी, फिर भी 25 जून 2026 को अंग्रेजी माध्यम अभिभावकों की बैठक आयोजित की गई। जिससे पूर्व में चयनित महिला एवं पुरुष सदस्यों में नाराजगी व्याप्त है एवं इस पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं संसद प्रतिनिधि अनिल सोनी, पंचराम यादव, जयप्रकाश वर्मा, बाबा नशीने आदि पार्षदों ने भी संस्था में जाकर जानकारी चाही, लेकिन प्राचार्य अनुपस्थित थीं और मीटिंग में होने की बात कही गई।
विरात महानगर का विश्लेषण: खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन में सामने आई यह अनियमितता न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह अभिभावकों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाती है। एक ऐसी समिति, जिसका उद्देश्य स्कूल के बेहतर संचालन में पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना है, यदि उसके गठन में ही मनमानी और पक्षपात हो, तो यह शैक्षणिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। शिक्षा विभाग को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और नियमानुसार नए सिरे से एसएमसी का गठन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि पीएम श्री स्कूल के उद्देश्यों को सही मायने में पूरा किया जा सके।
खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. खरोरा पीएम श्री स्कूल एसएमसी गठन को लेकर विवाद क्यों है?
A. अभिभावकों का आरोप है कि खरोरा पीएम श्री स्कूल में एसएमसी (स्कूल प्रबंधन समिति) का गठन नियमों को ताक पर रखकर, मनमाने तरीके से किया गया है। प्राचार्य पर पक्षपात और अपने चहेतों को समिति में शामिल करने का आरोप है।
Q. एसएमसी गठन के लिए सरकारी दिशा-निर्देश क्या हैं?
A. भारत सरकार और राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एसएमसी का गठन उन अभिभावकों की सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, ताकि स्कूल की व्यवस्था में उनकी सीधी भागीदारी हो सके।
Q. अभिभावकों ने किन अनियमितताओं की शिकायत की है?
A. अभिभावकों ने हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के लिए अलग-अलग बैठकें आयोजित करने, व्हाट्सप ग्रुप के माध्यम से सूचना न देने, और कुछ अभिभावकों के नाम द्वेषपूर्ण तरीके से सूची से हटाने की शिकायत की है। उन्होंने 23 जून और 25 जून 2026 को हुई बैठकों पर भी सवाल उठाए हैं।
Q. इस मामले में अधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया है?
A. रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DIO) सतीश नायर ने बताया कि पुरानी समिति को अभी भंग नहीं किया गया है और प्राचार्य खरोरा को इस प्रकार की बैठकें आयोजित करने से तुरंत रोकने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद 25 जून को बैठक आयोजित की गई।
Q. अभिभावक और स्थानीय नेता क्या मांग कर रहे हैं?
A. अभिभावक रमेश शर्मा, दुष्यंत कुमार साहू, पंकज चौहान सहित अन्य ने शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से पत्र के माध्यम से शासन के नियमानुसार नए सिरे से एसएमसी का गठन करने की मांग की है। स्थानीय नेताओं ने भी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
आधिकारिक संदर्भ: शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
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