पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा से पूछताछ कर रही ईडी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2 हजार करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आज दूसरी बार पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे…

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2 हजार करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आज दूसरी बार पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा से पूछताछ कर रही है। इससे पहले 3 जनवरी को भी ईडी ने दोनों से लगभग पूरे दिन पूछताछ की थी। उस दौरान कुछ दस्तावेजों के लिए पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने ED से अतिरिक्त समय की माँग की थी।
गौरतलब है कि शराब घोटाला मामले में 28 दिसंबर को ED ने पूर्व मंत्री लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। छापेमारी कार्रवाई के दौरान ED ने नगद लेनदेन के कथित सबूत मिलने की जानकारी दी थी। 3 जनवरी को दोनों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। आज एक बार फिर कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा ईडी कार्यालय पहुँचे, जहाँ ईडी दोनों से लंबी पूछताछ कर रही है।
कथित शराब घोटाला: मामले की पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला 2019-2022 की अवधि से जुड़ा है, जब राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और कवासी लखमा आबकारी मंत्री के पद पर थे। ईडी की जाँच के अनुसार राज्य की देशी एवं अंग्रेजी शराब की दुकानों से अवैध तरीके से 2000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम उगाही गई, जिसे आबकारी विभाग, थोक विक्रेताओं, और कथित बिचौलियों के एक नेटवर्क के माध्यम से वितरित किया गया।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब आयकर विभाग की एक रिपोर्ट में राज्य के शराब उद्योग में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का जिक्र हुआ। बाद में ईडी ने “मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम” (PMLA) के तहत जाँच शुरू की। मामले में कई आईएएस अधिकारी, कारोबारी, और राजनीतिक हस्तियाँ रडार पर हैं।
कवासी लखमा का राजनीतिक प्रोफाइल
कवासी लखमा छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं। वे आदिवासी समुदाय के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और बस्तर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। 2018 की कांग्रेस सरकार में उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। उनके राजनीतिक प्रभाव और बस्तर क्षेत्र में जनाधार के कारण यह मामला राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।
ईडी की जाँच प्रक्रिया और कानूनी ढाँचा
PMLA के तहत ईडी को किसी संदिग्ध से लंबी पूछताछ करने, उसके ठिकानों पर छापे मारने, और संपत्ति कुर्क करने का अधिकार है। ईडी की जाँच में आरोपी को पूछताछ के लिए बार-बार बुलाया जा सकता है। दस्तावेजों की जाँच, बैंक खातों का विश्लेषण, और संपत्ति के स्रोत की पड़ताल इस प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। अगर पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो गिरफ्तारी भी हो सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। यह विवाद एक बार फिर इस पुरानी बहस को सतह पर ला रहा है — क्या केंद्रीय एजेंसियाँ निष्पक्षता से काम करती हैं, या उनका इस्तेमाल विरोधी दलों के नेताओं को निशाना बनाने के लिए होता है।
विरात महानगर का विश्लेषण: कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला राज्य की राजनीति का सबसे चर्चित प्रकरण बन चुका है। ईडी की कार्रवाई के परिणाम जो भी हों, यह मामला भारत में आबकारी नीति के पारदर्शी प्रबंधन की चुनौती को रेखांकित करता है। शराब का राजस्व कई राज्य सरकारों की आय का बड़ा हिस्सा होता है, और इसी क्षेत्र में सबसे अधिक भ्रष्टाचार की आशंका भी रहती है। आवश्यक यह है कि जाँच एजेंसियाँ निष्पक्ष रूप से तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट दें, और न्यायपालिका तय करे कि किसकी कितनी जिम्मेदारी है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर सत्य तक पहुँचना ही न्याय की वास्तविक कसौटी होगी।
छत्तीसगढ़, पूर्व, आबकारी, मंत्री, कवासी, लखमा, और, उनके, बेटे, हरीश — संक्षेप और और पढ़ें
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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