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देवभोग का मामला: बिना अनुमति बना 3 करोड़ का पुल

📑 इस लेख मेंदेवभोग में बिना छत्तीसगढ़ शासन की अनुमति ओडिशा के ठेकेदार ने 3 करोड़ का पुल और सड़क बना दी, मामले की जांच शुरू।सीमा क्षेत्र में…

📅 24 December 2025, 11:24 am अपडेट: 16 May 2026
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देवभोग में बिना छत्तीसगढ़ शासन की अनुमति ओडिशा के ठेकेदार ने 3 करोड़ का पुल और सड़क बना दी, मामले की जांच शुरू।

रायपुर/देवभोग। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ओडिशा के एक ठेकेदार ने बिना किसी प्रशासनिक या तकनीकी अनुमति के करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से पुल और सड़क का निर्माण कर दिया। सबसे गंभीर बात यह है कि इस निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन से किसी भी प्रकार की स्वीकृति नहीं ली गई

मामला उजागर होते ही लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है। अब यह जांच का विषय बन गया है कि इतनी बड़ी परियोजना बिना अनुमति कैसे पूरी कर ली गई।


सीमा क्षेत्र में हुआ निर्माण

जानकारी के अनुसार, यह पुल छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमा से सटे देवभोग क्षेत्र में बनाया गया है। ठेकेदार ओडिशा का निवासी है और उसने ओडिशा की ओर से अनुमति होने का दावा किया है, लेकिन छत्तीसगढ़ की सीमा में आने वाले हिस्से के लिए राज्य सरकार या जिला प्रशासन से कोई एनओसी नहीं ली गई


नियमों की खुली अनदेखी

नियमानुसार, अंतरराज्यीय सीमा से जुड़े किसी भी पुल या सड़क निर्माण के लिए—

  • दोनों राज्यों की सहमति
  • तकनीकी स्वीकृति
  • पर्यावरणीय अनुमति
  • भूमि स्वामित्व की जांच

अनिवार्य होती है। लेकिन इस मामले में इन सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया।


सड़क भी बना दी गई

पुल के साथ-साथ संबंधित पहुंच मार्ग यानी सड़क का भी निर्माण कर दिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण कार्य काफी समय से चल रहा था, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा कि यह काम बिना अनुमति हो रहा है।


प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

  • इतने बड़े निर्माण की जानकारी स्थानीय प्रशासन को क्यों नहीं लगी?
  • किसकी निगरानी में यह कार्य हुआ?
  • क्या किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई?

इन सवालों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


जांच के आदेश

मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि—

  • निर्माण से जुड़े दस्तावेज खंगाले जाएंगे
  • ठेकेदार से जवाब मांगा जाएगा
  • नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी

संभावना है कि निर्माण को अवैध घोषित कर जुर्माना, एफआईआर या निर्माण ध्वस्त करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।


स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से उन्हें आवागमन में सुविधा मिली है, लेकिन वे यह भी मानते हैं कि कानून और नियमों का पालन जरूरी है
कुछ लोगों ने आशंका जताई कि बिना तकनीकी जांच के बने पुल से भविष्य में सुरक्षा खतरा भी हो सकता है।


सरकार की छवि पर असर

यह मामला राज्य सरकार की प्रशासनिक निगरानी और सीमा क्षेत्रों में समन्वय व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। यदि बिना अनुमति करोड़ों की परियोजना खड़ी हो सकती है, तो यह सिस्टम की बड़ी चूक मानी जा रही है।


आगे क्या?

अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि—

  • जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं
  • ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होती है
  • निर्माण को वैध किया जाएगा या हटाया जाएगा

निष्कर्ष

देवभोग में बिना अनुमति बना 3 करोड़ का पुल केवल एक निर्माण विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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