आर्ट ऑफ गिविंग ने छत्तीसगढ़ के वॉलीबॉल मैदानों को बांटे बॉल और नेट, राजेश मूणत बोले — “गांव-गांव से निकलेंगे राष्ट्रीय खिलाड़ी”
📑 इस लेख मेंराजेश मूणत बोले — खेल अनुशासन और व्यक्तित्व का सबसे बड़ा माध्यमगजराज पगारिया का संदेश — शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरकअकरम खान ने बताया…
रायपुर, 17 मई 2026। राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित श्री हटकेश्वर नाथ वॉलीबॉल क्लब में रविवार को खेल और खिलाड़ियों के उत्साह से भरा एक शानदार आयोजन हुआ। प्रसिद्ध समाजसेवी प्रो. अच्युत सामंत द्वारा स्थापित “आर्ट ऑफ गिविंग” संस्था ने अपनी 13वीं वर्षगांठ के अवसर पर “Share to Shine — Through Volunteerism” अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और खेल मैदानों के लिए वॉलीबॉल बॉल और नेट का सामूहिक वितरण किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष खिलाड़ी, प्रशिक्षक, खेल अधिकारी और खेल प्रेमी शामिल हुए।

राजेश मूणत बोले — खेल अनुशासन और व्यक्तित्व का सबसे बड़ा माध्यम
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत ने अपने संबोधन में कहा कि “खेल केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि अनुशासन, संघर्ष और व्यक्तित्व निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम है।” उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है — ज़रूरत सिर्फ सही संसाधन और मंच की है। आर्ट ऑफ गिविंग की इस पहल की प्रशंसा करते हुए विधायक मूणत ने कहा कि गांव-गांव और छोटे शहरों तक खेल सामग्री पहुंचने से युवा खिलाड़ियों को नई ऊर्जा मिलेगी और आने वाले वर्षों में राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।

गजराज पगारिया का संदेश — शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मैट्स यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री गजराज पगारिया ने कहा कि स्वस्थ समाज और मज़बूत युवा शक्ति के निर्माण में खेलों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि “शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।” पगारिया ने आगे कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं के सपनों को उड़ान देने का काम करते हैं और मैट्स यूनिवर्सिटी भी छात्र-छात्राओं के खेल विकास के लिए हर संभव सहयोग करती रहेगी।
अकरम खान ने बताया — पूरे भारत में चल रहा है यह अभियान
छत्तीसगढ़ स्टेट वॉलीबॉल एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री मो. अकरम खान ने बताया कि आर्ट ऑफ गिविंग संस्था द्वारा यह अभियान पूरे भारत में चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों, क्लबों और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय वॉलीबॉल समितियों को बॉल और नेट प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा — “संस्था के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत की यह पहल खिलाड़ियों के लिए बेहद प्रेरणादायक है। हर वर्ष राज्य को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।”
किन-किन क्लबों और जिलों को मिली खेल सामग्री
कार्यक्रम में राज्य के एक दर्जन से अधिक जिलों और लगभग 30 से अधिक क्लबों को वॉलीबॉल और नेट वितरित किए गए। प्रमुख क्लबों और स्थानों में शामिल हैं —
- हटकेश्वर नाथ वॉलीबॉल क्लब, रायपुरा
- मैट्स यूनिवर्सिटी, रायपुर
- साईंनाथ अमलेश्वर
- हुडको वॉलीबॉल क्लब, दुर्ग
- महाराणा प्रताप क्लब, सेक्टर भिलाई
- मयूर क्लब, खम्हरिया
- कोनारी क्लब और यूथ स्पोर्ट्स क्लब, अभनपुर
- कोरिया जिला, बढ़ईपारा, सिमगा, कुथरौद, नवापारा, कसडोल, ओटगन
- गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, कबीरधाम
- बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, सूरजपुर, अंबिकापुर
- धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर और दंतेवाड़ा
- सिटी स्पोर्ट्स क्लब, रायपुर
कार्यक्रम में महिला वॉलीबॉल टीम की खिलाड़ियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। ब्लू-ब्लैक जर्सी में पहुंची युवा खिलाड़ियों ने Share to Shine अभियान का बैनर थामकर मंच पर तस्वीरें खिंचवाईं और संस्था के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

आर्ट ऑफ गिविंग — क्या है यह संस्था और इसका लक्ष्य
आर्ट ऑफ गिविंग (Art of Giving) ओडिशा के प्रसिद्ध शिक्षाविद् और समाजसेवी प्रो. (डॉ.) अच्युत सामंत द्वारा 17 मई 2013 को शुरू की गई एक वैश्विक “जीवन-दर्शन” आधारित संस्था है। यह दिन हर साल “विश्व साझाकरण दिवस” (World Day of Sharing) के रूप में मनाया जाता है। संस्था का मूल मंत्र है — “सेवा से सम्मान, बांटने से समृद्धि।” अब तक भारत के 100 से अधिक शहरों और 20 से ज़्यादा देशों में संस्था की गतिविधियाँ चल रही हैं — खेल सामग्री वितरण, स्वास्थ्य शिविर, पौधारोपण, बच्चों की शिक्षा सहायता और सामाजिक जागरूकता अभियान इसके मुख्य आयाम हैं।
उपस्थित खेल प्रेमी और गणमान्य
कार्यक्रम में सतेन्द्र पाण्डेय, अनवर अली, विनोद नायर, मंगलेश्वर सिंह, मार्तण्ड सिंह, जितेन्द्र सिंह, रमाकांत निषाद, नितिन पाण्डेय, गुरमीत सिंह, राजेन्द्र वर्मा, आशुतोष शर्मा, श्री डी.सी.एच. सुरी बाबू, दुर्गा राव, जनक यादव, अमोल गरुड़ी, इरफानुल हयात, श्री अजीत कुटटन, सी.के. वर्मा, प्रांजल दास, राजेश मणी, अनिल सिंह, श्री दुलेन्द्र, गौरंग चौबे, दीपक मौर्य, एम.डी. साहू, विरेन्द्र पटेल, शशांक चौहान, ओम बागी, सुश्री सुनिधि पाण्डेय, रंजीत मिश्रा और विनोद सिंह सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेल पदाधिकारी और खेल प्रेमी उपस्थित रहे।
विरात महानगर का विश्लेषण: छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहाँ खेल अधोसंरचना अब भी विकासशील है, गैर-सरकारी संस्थाओं की ऐसी पहल बेहद ज़रूरी है। आर्ट ऑफ गिविंग ने जिस तरह राज्य के दूरस्थ ज़िलों — दंतेवाड़ा, कोंडागांव, कांकेर, बीजापुर तक खेल सामग्री पहुंचाने का काम किया है, वह सरकारी योजनाओं की सीमाओं को पूरक रूप से भरने का एक बेहतरीन मॉडल है। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा वॉलीबॉल जैसे “लो-कॉस्ट हाई-इम्पैक्ट” खेल में बेहद मेधावी होते हैं — झारखंड और ओडिशा के कई राष्ट्रीय खिलाड़ी इन्हीं छोटे गांवों से निकले हैं। अब यदि छत्तीसगढ़ खेल विभाग इस तरह की वितरण योजनाओं को संस्थागत समर्थन दे — कोच, यूनिफ़ॉर्म, यात्रा भत्ता और राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भागीदारी की व्यवस्था करे — तो आने वाले 5 वर्षों में राज्य से कई महिला-पुरुष राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी निकल सकते हैं। राजेश मूणत का यह कहना कि “गांव-गांव से राष्ट्रीय खिलाड़ी निकलेंगे” तभी सच होगा जब बॉल-नेट जैसे संसाधन वितरण के साथ-साथ ज़मीनी ट्रेनिंग और प्रतियोगिता के अवसर भी बढ़ेंगे।
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