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भारतमाला प्रोजेक्ट: 86 हजार पेड़ कटे, 4 लाख पौधों के लिए जमीन नहीं

📑 इस लेख मेंभारतमाला परियोजना में 86 हजार पेड़ कटे, 4 लाख पौधारोपण के लिए कांकेर और कोंडागांव में जमीन नहीं, पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता86 हजार…

📅 21 April 2026, 11:20 am अपडेट: 16 May 2026
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भारतमाला परियोजना में 86 हजार पेड़ कटे, 4 लाख पौधारोपण के लिए कांकेर और कोंडागांव में जमीन नहीं, पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता

रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है, लेकिन इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परियोजना के अंतर्गत लगभग 86 हजार पेड़ों की कटाई की जा चुकी है, जबकि इसके बदले में लगाए जाने वाले करीब 4 लाख पौधों के लिए कांकेर और कोंडागांव जिलों में जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

इस स्थिति ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन और वन विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। नियमों के अनुसार जितने पेड़ काटे जाते हैं, उसके बदले कई गुना पौधारोपण करना अनिवार्य होता है, लेकिन जमीन की कमी के कारण यह कार्य प्रभावित हो रहा है। 🌳

86 हजार पेड़ों की कटाई

सूत्रों के अनुसार भारतमाला परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण और नए मार्गों के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई है। इन पेड़ों की कटाई विशेष रूप से वन क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में हुई है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक:

  • करीब 86 हजार पेड़ों की कटाई
  • बदले में 4 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
  • भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया जारी
  • कई जगह जमीन की कमी

परियोजना के तहत पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिपूरक पौधारोपण किया जाना आवश्यक है।

जमीन की तलाश में प्रशासन

वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा पौधारोपण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन उपयुक्त भूमि नहीं मिलने से प्रक्रिया धीमी हो गई है। विशेष रूप से कांकेर और कोंडागांव जिलों में जमीन चिन्हित करने में कठिनाई आ रही है।

अधिकारियों का कहना है कि:

  • सरकारी भूमि सीमित
  • निजी भूमि पर सहमति की जरूरत
  • वन क्षेत्र में तकनीकी बाधाएं
  • राजस्व रिकॉर्ड में समस्या

इन कारणों से पौधारोपण योजना समय पर शुरू नहीं हो पा रही है।

पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई के बाद पौधारोपण में देरी से पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • तापमान में बढ़ोतरी
  • जल स्तर में गिरावट
  • जैव विविधता पर असर
  • वन्यजीवों का आवास प्रभावित

इसलिए जल्द से जल्द पौधारोपण की प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यकता है। 🌿

प्रशासन ने दिए निर्देश

जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को जल्द जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि पौधारोपण कार्य मानसून से पहले शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशासन की योजना:

  • पंचायत स्तर पर जमीन की पहचान
  • सरकारी भूमि का उपयोग
  • सामुदायिक भूमि का चयन
  • वन विभाग की निगरानी

भारतमाला परियोजना का महत्व

भारतमाला परियोजना का उद्देश्य देशभर में सड़क नेटवर्क को मजबूत करना है। इस परियोजना के तहत कई राज्यों में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में भी इस परियोजना के तहत कई सड़क परियोजनाएं चल रही हैं, जिससे यातायात सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है।

ग्रामीणों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण का स्वागत किया है, लेकिन पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता भी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी है।

मानसून से पहले चुनौती

अधिकारियों के सामने मानसून से पहले पौधारोपण की बड़ी चुनौती है। यदि समय पर जमीन नहीं मिलती है तो पौधारोपण का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

आगे की योजना

प्रशासन ने बताया कि जल्द ही अन्य जिलों में भी जमीन की तलाश की जाएगी और वैकल्पिक स्थानों पर पौधारोपण किया जाएगा।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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