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सड़कों पर ई-रिक्शों का दबाव, 8 रूट में 22 हजार वाहन

📑 इस लेख मेंरायपुर में 8 रूटों पर 22 हजार ई-रिक्शे, 60 प्रतिशत खाली चलने से ट्रैफिक जाम, नागरिक परेशान, प्रशासन से नियंत्रण की मांग8 प्रमुख रूटों पर…

📅 8 April 2026, 11:05 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर में 8 रूटों पर 22 हजार ई-रिक्शे, 60 प्रतिशत खाली चलने से ट्रैफिक जाम, नागरिक परेशान, प्रशासन से नियंत्रण की मांग

राजधानी रायपुर में ट्रैफिक व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर की सड़कों पर बढ़ते ई-रिक्शों की संख्या अब जाम का प्रमुख कारण बनती जा रही है। जानकारी के अनुसार शहर के 8 प्रमुख रूटों पर करीब 22 हजार ई-रिक्शे दौड़ रहे हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत रिक्शे खाली चलते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। 🚦

8 प्रमुख रूटों पर सबसे ज्यादा दबाव

शहर के प्रमुख बाजार और व्यस्त इलाकों में ई-रिक्शों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्र और मुख्य मार्गों पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शे संचालित हो रहे हैं। इन रूटों पर बिना किसी नियमन के ई-रिक्शों के संचालन से सड़कें संकरी हो रही हैं और जाम की स्थिति बन रही है।

ट्रैफिक विभाग के अनुसार इन 8 रूटों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा जा रहा है। सुबह और शाम के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब ऑफिस और स्कूल समय में यातायात बढ़ जाता है।

60 प्रतिशत रिक्शे खाली चलते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में ई-रिक्शे खाली चलते रहते हैं। चालक यात्रियों की तलाश में सड़कों पर धीरे-धीरे चलते हैं या बीच सड़क में रुक जाते हैं, जिससे ट्रैफिक बाधित होता है।

यही कारण है कि सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद यातायात सुचारू रूप से नहीं चल पाता। कई बार एक ही स्थान पर दर्जनों ई-रिक्शे खड़े हो जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति बन जाती है।

ट्रैफिक व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

शहर में पहले से ही बढ़ते वाहनों की संख्या ट्रैफिक व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में ई-रिक्शों की अनियंत्रित संख्या ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।

यातायात पुलिस का कहना है कि बिना निर्धारित स्टैंड और रूट के संचालन से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है। कई ई-रिक्शे मुख्य सड़कों पर ही सवारी उठाने और उतारने लगते हैं, जिससे ट्रैफिक रुक जाता है।

नागरिकों को हो रही परेशानी

रोजाना इस समस्या से हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, छात्र और आम नागरिकों को जाम में फंसना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार कुछ दूरी तय करने में 20 से 30 मिनट का समय लग जाता है। इससे समय की बर्बादी के साथ ईंधन की खपत भी बढ़ रही है।

प्रशासन से नियंत्रण की मांग

नागरिकों ने प्रशासन से ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ई-रिक्शों के लिए अलग स्टैंड और निर्धारित रूट बनाए जाने चाहिए, ताकि ट्रैफिक सुचारू रूप से चल सके।

ट्रैफिक विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि ई-रिक्शों के संचालन के लिए परमिट प्रणाली लागू की जाए और निर्धारित स्थानों पर ही सवारी लेने की अनुमति दी जाए।

प्रशासन की तैयारी

प्रशासन द्वारा इस समस्या को लेकर योजना तैयार किए जाने की बात कही जा रही है। जल्द ही ई-रिक्शों के लिए अलग स्टैंड, रूट निर्धारण और संख्या सीमित करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जल्द समाधान की उम्मीद

शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए नागरिकों को जल्द समाधान की उम्मीद है। यदि ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित की जाती है, तो ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

फिलहाल 8 रूटों पर 22 हजार ई-रिक्शों का संचालन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है और नागरिकों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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