कोरिया में खेतों में बने छोटे तालाब, भूजल स्तर 5.41 मीटर बढ़ा: जनभागीदारी मॉडल की प्रधानमंत्री ने की सराहना
📑 इस लेख मेंकोरिया में खेतों में छोटे तालाब बनने से भूजल स्तर 5.41 मीटर बढ़ा, जनभागीदारी मॉडल की प्रधानमंत्री ने सराहना की।जनभागीदारी से बदली तस्वीरकिसानों को मिला…
कोरिया में खेतों में छोटे तालाब बनने से भूजल स्तर 5.41 मीटर बढ़ा, जनभागीदारी मॉडल की प्रधानमंत्री ने सराहना की।
कोरिया जिला में जल संरक्षण की अनूठी पहल ने मिसाल कायम की है। खेतों में बनाए गए छोटे-छोटे तालाबों से न केवल किसानों को लाभ मिला, बल्कि जिले का भूजल स्तर भी 5.41 मीटर तक बढ़ गया है। इस जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल को नरेंद्र मोदी ने भी प्रेरक बताया है। इससे यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
जिले में जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर खेतों में छोटे-छोटे तालाब बनाने की पहल शुरू की थी। इस योजना के तहत किसानों ने अपनी जमीन पर जल संग्रहण संरचनाएं तैयार कीं, जिससे बारिश का पानी संरक्षित होने लगा। परिणामस्वरूप भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
जनभागीदारी से बदली तस्वीर
इस अभियान में ग्रामीणों, किसानों और प्रशासन ने मिलकर काम किया। लोगों ने स्वेच्छा से तालाब निर्माण में सहयोग दिया। इससे जल संरक्षण का अभियान जन आंदोलन बन गया।
अधिकारियों के अनुसार, तालाब बनने से वर्षा जल का बेहतर संचयन हुआ। इससे न केवल भूजल स्तर बढ़ा, बल्कि किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध होने लगा।
किसानों को मिला सीधा लाभ
छोटे तालाब बनने से किसानों की फसलों को सिंचाई सुविधा मिली। पहले जहां बारिश पर निर्भर रहना पड़ता था, अब किसान दूसरी फसल भी लेने लगे हैं। इससे किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि तालाब बनने से पानी की समस्या काफी हद तक कम हो गई है। इससे खेती आसान हुई है और उत्पादन भी बढ़ा है।
भूजल स्तर में 5.41 मीटर की वृद्धि
जल संरक्षण के इस अभियान का असर भूजल स्तर पर भी दिखाई दिया। अधिकारियों के अनुसार, जिले में भूजल स्तर औसतन 5.41 मीटर तक बढ़ा है। यह उपलब्धि राज्य में जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने बताया प्रेरक मॉडल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जनभागीदारी का प्रेरक मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं और कोरिया का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
अन्य जिलों में लागू करने की तैयारी
इस सफलता के बाद अब इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है। प्रशासन ने कहा कि जल संरक्षण के लिए यह मॉडल प्रभावी साबित हुआ है।
पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा
छोटे तालाब बनने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। इससे आसपास हरियाली बढ़ी है और जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ है।
ग्रामीणों में बढ़ी जागरूकता
इस अभियान के बाद ग्रामीणों में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। लोग अब वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए स्वयं पहल कर रहे हैं।
निष्कर्ष
कोरिया जिले में खेतों में बने छोटे तालाबों से जल संरक्षण का सफल मॉडल सामने आया है। भूजल स्तर बढ़ने के साथ किसानों को भी इसका लाभ मिला है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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