रायपुर बजट सत्र में विधायक चौधरी ने कहा कि छातिम-दमास पेड़ सेहत और प्रकृति के लिए खतरा हैं, अब उन्हें शहर में नहीं लगाया जाएगा।
छातिम-दमास पेड़ को लेकर विधायक की चिंता
राजधानी रायपुर में बजट सत्र के दौरान विधानसभा में विधायक चौधरी ने छातिम-दमास पेड़ को लेकर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि यह पेड़ न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन चुका है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव
चौधरी ने सदन में बताया कि छातिम-दमास पेड़ से निकलने वाले पराग और अन्य तत्व एलर्जी, श्वसन संबंधी रोग और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।
उन्होंने कहा कि शहर में कई क्षेत्रों में यह पेड़ बड़े पैमाने पर लगाए गए हैं, जिससे नागरिकों को परेशानी हो रही है।
अब नए पेड़ नहीं लगाए जाएंगे
विधायक चौधरी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में छातिम-दमास पेड़ को कहीं भी लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
साथ ही यह भी कहा गया कि शहर की हरित योजना के तहत ऐसे पेड़ों की जगह स्थानीय और स्वास्थ्य के अनुकूल प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पारंपरिक हरित विकास योजना पर असर
सदन में चर्चा के दौरान पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि छातिम-दमास पेड़ की कटाई और नई पौध रोपण की दिशा में कदम उठाना जरूरी है।
साथ ही शहर में हरित आवरण बनाए रखने के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्य-सहायक पेड़ों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया।
प्रशासन और निगम की भूमिका
विधायक के सुझाव पर नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वे छातिम-दमास पेड़ की पहचान कर उनके सुरक्षित स्थानांतरण या हटाने की योजना बनाएं।
इस पहल से शहर की हरित योजना में संतुलन और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से छातिम-दमास पेड़ के कारण एलर्जी और स्वच्छता संबंधी समस्याएं बढ़ रही थीं।
अब इनके हटने से शहर में स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य संतुलन
सदन में यह भी बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
इसके लिए स्थानीय पौधों और छायादार पेड़ों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
भविष्य की योजना
विधायक चौधरी ने कहा कि आगामी बजट में स्वास्थ्य-सहायक और पर्यावरण हितैषी पेड़ लगाने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे।
नगर निगम और पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय प्रजातियों की पौधरोपण योजना तैयार करें।

