रायपुर में गैस सिलेंडर की कमी से उपभोक्ता परेशान हैं। बुकिंग के समय कम कीमत, लेकिन डिलीवरी पर अधिक भुगतान और पांच दिन तक इंतजार करना पड़ रहा।
गैस सिलेंडर की कमी से बढ़ी परेशानी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की कमी से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि सिलेंडर बुकिंग के समय जो कीमत दिखाई जाती है, डिलीवरी के समय उससे अधिक राशि वसूली जा रही है।
इसके साथ ही कई उपभोक्ताओं को पांच-पांच दिन तक सिलेंडर की डिलीवरी का इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे घरेलू रसोई का काम प्रभावित हो रहा है।
बुकिंग और डिलीवरी कीमत में अंतर
कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि ऑनलाइन या फोन के माध्यम से सिलेंडर बुक करते समय कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन जब डिलीवरी होती है तो उनसे ज्यादा पैसे मांगे जाते हैं।
इस अंतर को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि कीमत में बदलाव होता है तो इसकी स्पष्ट जानकारी पहले ही दी जानी चाहिए।
पांच दिन बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर
सिलेंडर की कमी के कारण डिलीवरी में भी देरी हो रही है। सामान्य तौर पर जहां एक या दो दिन में सिलेंडर मिल जाता था, वहीं अब कई उपभोक्ताओं को चार से पांच दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
इस देरी से खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को अधिक परेशानी हो रही है, क्योंकि उनकी रसोई पूरी तरह एलपीजी गैस पर निर्भर रहती है।
युद्ध के असर की चर्चा
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध जैसे तनावपूर्ण परिस्थितियों का असर ईंधन आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
यदि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है तो गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि स्थानीय स्तर पर संबंधित एजेंसियों द्वारा स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है।
एजेंसियों का कहना – जल्द होगी स्थिति सामान्य
गैस एजेंसियों का कहना है कि कुछ तकनीकी और आपूर्ति संबंधी कारणों से सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित हुई है। लेकिन जल्द ही सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है।
उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और नियमित प्रक्रिया के तहत बुकिंग करें।
उपभोक्ताओं की मांग
उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता होनी चाहिए। बुकिंग और डिलीवरी के समय कीमत में अंतर नहीं होना चाहिए और डिलीवरी समय पर मिलनी चाहिए।
लोगों का मानना है कि यदि व्यवस्था बेहतर की जाए तो ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता है और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

