रायपुर में सर्विस लेन के लिए 10 साल पहले अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बढ़ने पर विवाद बढ़ा। अब NHAI ने मामले में कोर्ट का रुख किया।
जमीन अधिग्रहण का पुराना मामला फिर चर्चा में
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सर्विस लेन निर्माण के लिए लगभग 10 साल पहले अधिग्रहित की गई जमीन का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जानकारी के अनुसार जमीन के मुआवजे की राशि दोगुनी हो जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।
मामले में अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अदालत का रुख किया है। इस कदम के बाद जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
सर्विस लेन निर्माण के लिए ली गई थी जमीन
बताया जा रहा है कि करीब एक दशक पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सर्विस लेन बनाने के लिए कई किसानों और जमीन मालिकों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। उस समय निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा तय किया गया था और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
लेकिन बाद में जमीन की कीमतों और मुआवजा निर्धारण से जुड़े नियमों में बदलाव के कारण मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी का मुद्दा सामने आया।
मुआवजा दोगुना होने से बढ़ा विवाद
नए नियमों और मूल्यांकन के आधार पर मुआवजा राशि पहले से लगभग दोगुनी हो गई। इसके बाद यह मामला विवाद का कारण बन गया।
जमीन मालिकों का कहना है कि उन्हें वर्तमान नियमों के अनुसार उचित मुआवजा मिलना चाहिए, जबकि दूसरी ओर संबंधित एजेंसी का मानना है कि पहले तय किए गए मुआवजे के आधार पर ही प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
NHAI ने किया कोर्ट का रुख
मामले में स्पष्टता लाने और कानूनी समाधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही लिया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन मालिकों को संशोधित मुआवजा मिलेगा या पहले तय की गई राशि ही मान्य होगी।
जमीन मालिकों की उम्मीद
जमीन मालिकों को उम्मीद है कि अदालत में उनकी बात सुनी जाएगी और उन्हें उचित मुआवजा मिलेगा। उनका कहना है कि जमीन की कीमतों में पिछले वर्षों में काफी बढ़ोतरी हुई है, इसलिए उन्हें वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए।
परियोजना पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद कई बार सड़क और आधारभूत संरचना परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्ट नियम बेहद जरूरी हैं।
रायपुर में सामने आया यह मामला भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें अब अदालत के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

