रायपुर में प्रशासन ने सभी विभागों को 21 दिनों में शिकायतों का निपटारा करने का निर्देश दिया, देरी पर अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
रायपुर। आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अब किसी भी शिकायत को लंबित रखना अधिकारियों के लिए भारी पड़ सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी विभागों को 21 दिनों के भीतर शिकायतों का अनिवार्य रूप से निराकरण करना होगा। तय समय-सीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह निर्णय नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्य संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि जनदर्शन, ऑनलाइन पोर्टल और विभागीय कार्यालयों में दी गई शिकायतें महीनों तक लंबित रहती हैं, जिससे आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
21 दिन की समय-सीमा अनिवार्य
नए निर्देशों के तहत अब सभी विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदन, शिकायत या समस्या से संबंधित हर प्रकरण का निराकरण अधिकतम 21 दिनों के भीतर किया जाए। यदि किसी प्रकरण में तकनीकी या कानूनी कारणों से देरी हो रही है, तो संबंधित अधिकारी को स्पष्ट कारण दर्ज करते हुए उच्च अधिकारियों को जानकारी देनी होगी।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि बिना ठोस कारण के किसी भी शिकायत को लंबित रखना लापरवाही की श्रेणी में माना जाएगा।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी
बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि शिकायतों के निराकरण में कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लगातार विलंब या लापरवाही की शिकायतें मिलेंगी, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने कार्यालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और साप्ताहिक रिपोर्ट तैयार करें।
ऑनलाइन और जनदर्शन शिकायतों पर भी लागू होगा नियम
यह नई व्यवस्था केवल कार्यालयीन आवेदनों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और जनदर्शन कार्यक्रमों में दर्ज सभी शिकायतों पर भी समान रूप से लागू होगी। प्रशासन का कहना है कि डिजिटल माध्यम से प्राप्त शिकायतों की निगरानी और ट्रैकिंग आसान होती है, इसलिए उनमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
आम नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ
इस फैसले से सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। अब बिजली, पानी, सड़क, राजस्व, पेंशन, राशन कार्ड, आवास योजना, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी शिकायतें लंबे समय तक अटकी नहीं रहेंगी। तय समय सीमा में समाधान मिलने से लोगों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था से न केवल विभागीय कार्यप्रणाली सुधरेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और अनावश्यक लेन-देन की शिकायतों पर भी अंकुश लगेगा।
जवाबदेही तय करने की नई पहल
प्रशासन ने यह भी तय किया है कि हर शिकायत के साथ संबंधित अधिकारी का नाम और विभाग दर्ज किया जाएगा, ताकि बाद में यह स्पष्ट किया जा सके कि किसी प्रकरण के निराकरण में देरी किस स्तर पर हुई।
इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिम्मेदारी तय हो सके और भविष्य में शिकायतों को टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगे।
समीक्षा बैठकें होंगी नियमित
अब जिले स्तर पर नियमित अंतराल में समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें यह देखा जाएगा कि किस विभाग में कितने प्रकरण लंबित हैं और किस अधिकारी के स्तर पर विलंब हो रहा है। खराब प्रदर्शन करने वाले विभागों को विशेष निगरानी में रखा जाएगा।
पारदर्शी प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह पहल पारदर्शी और उत्तरदायी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समयबद्ध शिकायत निवारण से न केवल जनता की परेशानी कम होगी, बल्कि विभागों में कार्य अनुशासन भी बढ़ेगा।
यह व्यवस्था भविष्य में पूरे जिले के प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और नागरिकों के अनुकूल बनाने में मदद करेगी।

