छत्तीसगढ़ सरकार ने होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस से ड्राई-डे हटाए, अब इन दिनों शराब दुकानें खुली रहेंगी, फैसले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज।
रायपुर। राज्य सरकार ने आबकारी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए तीन प्रमुख अवसरों पर लागू रहने वाले ड्राई-डे को समाप्त कर दिया है। अब छत्तीसगढ़ में होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस के दिन भी शराब की दुकानें खुली रहेंगी। इस फैसले के बाद प्रदेशभर में आबकारी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राजधानी रायपुर में जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार यह निर्णय छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन तीन तिथियों को अब ड्राई-डे की सूची से बाहर कर दिया गया है।
पहले इन अवसरों पर बंद रहती थीं शराब दुकानें
अब तक प्रदेश में होली, मुहर्रम और महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस पर शराब बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहती थी। इन दिनों को सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखते हुए ड्राई-डे घोषित किया जाता था।
लेकिन नई व्यवस्था के तहत इन तीनों अवसरों पर आबकारी दुकानों को सामान्य दिनों की तरह खोलने की अनुमति दी गई है।
आबकारी नीति में किया गया संशोधन
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ड्राई-डे की संख्या को सीमित करते हुए व्यवसायिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है। इसके तहत राज्य की आबकारी नीति में आवश्यक बदलाव कर दिए गए हैं।
आदेश के अनुसार अब होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस पर शराब की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। सभी अधिकृत दुकानों को तय समय के अनुसार संचालन की अनुमति होगी।
राजस्व बढ़ाने की मंशा
सूत्रों के मुताबिक इस निर्णय के पीछे राज्य सरकार की मंशा आबकारी राजस्व में बढ़ोतरी करना भी मानी जा रही है। त्योहारों और अवकाश के दिनों में शराब की बिक्री अधिक होने के कारण सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व की संभावना रहती है।
आबकारी विभाग का मानना है कि बार-बार ड्राई-डे लागू होने से राज्य को राजस्व का नुकसान होता है, जिसे संतुलित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
सामाजिक संगठनों में नाराजगी
सरकार के इस निर्णय पर कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने आपत्ति भी जताई है। उनका कहना है कि होली और मुहर्रम जैसे पर्व सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े होते हैं।
इसी तरह गांधी निर्वाण दिवस राष्ट्रीय शोक दिवस माना जाता है, ऐसे दिन शराब दुकानों को खोलने का फैसला संवेदनशीलता के विपरीत बताया जा रहा है।
प्रशासन का तर्क
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शराब बिक्री से जुड़ा फैसला पूरी तरह नीति आधारित है और इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था से कोई समझौता करना नहीं है। त्योहारों और विशेष दिनों पर पुलिस एवं प्रशासन की अतिरिक्त व्यवस्था रहेगी ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
सभी जिलों में लागू होगा आदेश
आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह आदेश पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में लागू होगा। सभी जिलों में स्थित देशी और विदेशी शराब की अधिकृत दुकानों को समान रूप से यह छूट मिलेगी।
हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय प्रशासन किसी विशेष परिस्थिति में कानून-व्यवस्था को देखते हुए अस्थायी प्रतिबंध लगाने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
सरकार के इस निर्णय को लेकर विपक्ष ने भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिन तिथियों को सामाजिक और राष्ट्रीय भावना से जोड़कर ड्राई-डे घोषित किया गया था, अब उन्हें हटाना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
आम लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
आम लोगों के बीच भी इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि यह केवल राजस्व केंद्रित फैसला है, जबकि कुछ वर्ग इसे व्यवसायिक दृष्टिकोण से सही ठहरा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील अवसरों पर शराब बिक्री की अनुमति देना सामाजिक असर भी डाल सकता है, जिसे लेकर सरकार को संतुलित नीति अपनानी चाहिए।
आने वाले समय में और बदलाव संभव
सूत्रों के अनुसार सरकार आने वाले समय में ड्राई-डे से जुड़े अन्य प्रावधानों की भी समीक्षा कर सकती है। आबकारी नीति में और संशोधन की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
फिलहाल सरकार के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस पर शराब दुकानें खुली रहेंगी।

