रायपुर में पौने दो लाख ईवी से ट्रैफिक सिस्टम पर भारी दबाव, ई-रिक्शा, पार्किंग और चार्जिंग अव्यवस्था से जाम और दुर्घटना का खतरा बढ़ा।
रायपुर | रायपुर रायपुर शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसी के साथ ट्रैफिक व्यवस्था पर दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग पौने दो लाख ईवी सड़कों पर उतर चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या ई-रिक्शा, ई-ऑटो और निजी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की है।
परिणाम यह है कि मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी इलाकों तक जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी आम बात बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ठोस नीति और सख्त नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह चरमरा सकता है।
बढ़ती ईवी संख्या से बिगड़ता ट्रैफिक संतुलन
पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से ईवी को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन रायपुर में इनका संचालन बिना स्पष्ट प्लानिंग के हो रहा है। बड़ी संख्या में ई-रिक्शा और ई-ऑटो मुख्य सड़कों पर धीमी गति से चलते हैं, जिससे तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
ट्रैफिक विशेषज्ञों के मुताबिक शहर की सड़कों की चौड़ाई और लेन व्यवस्था मौजूदा ईवी ट्रैफिक के अनुरूप तैयार नहीं है।
ई-रिक्शा और ई-ऑटो बने जाम की बड़ी वजह
शहर के बाजार इलाकों, अस्पतालों, स्कूलों और बस स्टैंड के आसपास ई-रिक्शा चालकों द्वारा बीच सड़क सवारी बैठाना और उतारना आम हो गया है। इससे न केवल जाम लगता है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
ट्रैफिक विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कई ईवी चालकों के पास न तो तय रूट है और न ही निर्धारित स्टॉपेज।
पार्किंग संकट और चार्जिंग अव्यवस्था
रायपुर में पहले से ही पार्किंग की भारी कमी है। अब बड़ी संख्या में ईवी जुड़ने से यह समस्या और गंभीर हो गई है। कई स्थानों पर सड़क किनारे ईवी चार्जिंग के नाम पर अवैध पार्किंग हो रही है।
चार्जिंग प्वाइंट्स की संख्या सीमित होने के कारण वाहन लंबे समय तक खड़े रहते हैं, जिससे सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाती है।
ट्रैफिक पुलिस के लिए नई चुनौती
इस पूरे हालात से निपटना रायपुर ट्रैफिक पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। सीमित संसाधनों और स्टाफ के बीच लगातार बढ़ते वाहनों पर नियंत्रण कर पाना आसान नहीं है।
कई इलाकों में सुबह और शाम के पीक आवर में स्थिति सबसे ज्यादा बिगड़ जाती है।
नियमों की अनदेखी और प्रशिक्षण की कमी
ई-रिक्शा और ई-ऑटो चालकों के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण या ट्रैफिक ओरिएंटेशन की अनिवार्यता नहीं होने से समस्या और बढ़ रही है।
गलत साइड से वाहन चलाना, नो-पार्किंग में खड़ा करना और रेड लाइट जंप करना आम हो चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना प्रशिक्षण के बड़ी संख्या में नए चालक सड़क पर उतर रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर क्या है तैयारी
ईवी नीति के तहत वाहनों को प्रोत्साहन तो मिल रहा है, लेकिन शहरी यातायात के अनुरूप संचालन नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया गया है।
इस विषय पर छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन और नगरीय प्रशासन विभाग के बीच समन्वय की भी कमी सामने आ रही है।
समाधान क्या हो सकते हैं
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने व्यवस्था सुधारने के लिए कई सुझाव दिए हैं—
- ई-रिक्शा और ई-ऑटो के लिए अलग लेन या तय कॉरिडोर
- प्रमुख इलाकों में तय स्टॉपेज पॉइंट
- परमिट आधारित संख्या नियंत्रण
- चालकों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण
- डिजिटल ट्रैकिंग और रूट मॉनिटरिंग सिस्टम
- चार्जिंग स्टेशनों के लिए अलग पार्किंग जोन
स्मार्ट सिटी की राह में बड़ी चुनौती
रायपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना में ट्रैफिक मैनेजमेंट एक प्रमुख घटक है। यदि ईवी के संचालन के लिए अलग नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किया गया, तो स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम का सपना अधूरा रह सकता है।
आम नागरिकों की बढ़ती परेशानी
शहर के रहवासियों का कहना है कि ईवी से प्रदूषण जरूर कम हो रहा है, लेकिन ट्रैफिक जाम, देर से पहुंचना और सड़क पर बढ़ता तनाव उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है।
लोगों की मांग है कि ईवी को बढ़ावा देने के साथ-साथ ट्रैफिक अनुशासन और शहरी प्लानिंग पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए।
कैसे सुधरेगी व्यवस्था?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अब केवल चालान और अस्थायी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। रायपुर में ईवी आधारित ट्रैफिक प्रबंधन के लिए अलग मास्टर प्लान तैयार करना होगा, जिसमें सड़क डिजाइन, लेन प्रबंधन, पार्किंग और चार्जिंग नेटवर्क को एक साथ जोड़ा जाए।
जब तक यह समग्र योजना लागू नहीं होती, तब तक पौने दो लाख ईवी रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए चुनौती बने रहेंगे।

