शिव की बारात में शामिल हुए केरल के ‘कांतारा’ कलाकार और हरियाणा के अघोरी, भक्ति और लोक-संस्कृति का अनूठा संगम

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रायपुर-भिलाई की शिव बारात में केरल के कांतारा शैली कलाकार और हरियाणा के अघोरी साधु शामिल हुए, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने मिला।

रायपुर / भिलाई। महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर रायपुर और भिलाई में निकाली गई भव्य शिव बारात में इस बार देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों और साधुओं ने विशेष आकर्षण पैदा किया। शिव की बारात में केरल से आए ‘कांतारा’ शैली के कलाकारों और हरियाणा से पहुंचे अघोरी साधुओं की सहभागिता ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में केरल के कलाकारों ने चर्चित लोक-परंपरा और वेशभूषा के माध्यम से Kantara फिल्म से प्रेरित पारंपरिक प्रस्तुति दी, जबकि हरियाणा से आए अघोरी साधुओं ने अपने विशेष वेश, साधना और शिवभक्ति से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।


भव्य बारात में दिखा देश की संस्कृति का संगम

शिव बारात के दौरान डमरू, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के बीच कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। केरल से आए कलाकार पारंपरिक चेहरे की सजावट, रंगीन पोशाक और नृत्य शैली के साथ शिव की महिमा का संदेश देते नजर आए।

वहीं हरियाणा से आए अघोरी साधुओं ने शिव तांडव और साधना से जुड़ी झलक प्रस्तुत की, जिससे शिवभक्तों में विशेष उत्साह देखा गया।


‘कांतारा’ शैली की प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र

केरल से आए कलाकारों ने स्थानीय लोक कला और परंपरा के अनुरूप विशेष वेशभूषा में प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने ‘कांतारा’ शैली के रूप में पहचाना। यह प्रस्तुति पूरी तरह धार्मिक भावनाओं और लोक परंपरा से जुड़ी रही।

कलाकारों ने बताया कि उनकी कला प्रकृति, देवी-देवताओं और लोक विश्वासों से जुड़ी होती है, जिसे वे देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तुत कर सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं।


अघोरी साधुओं की मौजूदगी से बना आध्यात्मिक वातावरण

हरियाणा से आए अघोरी साधुओं की टोलियों ने शिव बारात में विशेष साधना भाव के साथ भाग लिया। उनके विशेष वेश, भस्म लेपन और जप-तप से पूरा माहौल शिवमय हो गया।

श्रद्धालुओं का कहना था कि अघोरी साधुओं को पास से देखने और शिव भक्ति में लीन देखना उनके लिए एक अनोखा अनुभव रहा।


शिवभक्तों की उमड़ी भारी भीड़

रायपुर और भिलाई में आयोजित इस शिव बारात को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़क के दोनों ओर जमा रहे। परिवार के साथ आए लोग, युवा और बच्चे सभी बारात के साथ चलते हुए झांकियों और प्रस्तुतियों का आनंद लेते नजर आए।

कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर कलाकारों और साधुओं का स्वागत भी किया।


सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश

आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाना है। केरल और हरियाणा जैसे दूर-दराज के राज्यों से आए कलाकारों और साधुओं की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि शिवभक्ति पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ती है।


आयोजन को लेकर प्रशासन की रही विशेष व्यवस्था

भारी भीड़ को देखते हुए आयोजन स्थलों और मार्गों पर पुलिस एवं स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। ट्रैफिक व्यवस्था, एम्बुलेंस और पेयजल जैसी सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।


हर साल और भव्य बनाने की तैयारी

आयोजकों ने बताया कि आने वाले वर्षों में शिव बारात को और अधिक भव्य स्वरूप देने की योजना है। इसमें देश के अन्य राज्यों की लोक कलाओं और धार्मिक परंपराओं को भी शामिल किया जाएगा, ताकि सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिल सके।

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