सख्ती नहीं, इसलिए लोग बेखौफ: 10 साल से 8 करोड़ का डायवर्सन शुल्क बकाया, नोटिस पर टिकी वसूली; बड़े बकाएदारों पर कार्रवाई भी शून्य

- Advertisement -
vastuguruji
Facebook
Twitter
LinkedIn
Pinterest
WhatsApp

रायपुर में दस वर्षों से आठ करोड़ रुपये का डायवर्सन शुल्क बकाया, सख्त कार्रवाई के अभाव में वसूली रुकी, बड़े बकाएदारों पर भी कार्रवाई नहीं।

रायपुर। राजधानी रायपुर में भूमि डायवर्सन शुल्क वसूली को लेकर प्रशासनिक लापरवाही लगातार सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार बीते 10 वर्षों से लगभग 8 करोड़ रुपये का डायवर्सन शुल्क बकाया है, लेकिन वसूली के नाम पर केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाई जा रही है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि बड़े बकाएदारों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे आम लोगों और भू-स्वामियों में प्रशासन का भय खत्म होता जा रहा है।

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार कई ऐसे प्रकरण हैं, जिनमें वर्षों पहले कृषि भूमि का गैर कृषि उपयोग शुरू हो चुका है, लेकिन संबंधित हितग्राहियों ने आज तक डायवर्सन शुल्क जमा नहीं किया। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से केवल नोटिस भेजकर फाइल बंद कर दी जाती है।


🏷️ हेडिंग 1: दस वर्षों से लंबित है करोड़ों की वसूली

राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस वर्षों में भूमि डायवर्सन से जुड़ी बड़ी संख्या में फाइलें लंबित हैं। इन मामलों में कुल बकाया राशि करीब 8 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन वसूली की गति बेहद धीमी है।


🏷️ हेडिंग 2: नोटिस तक सीमित रह गई कार्रवाई

अधिकांश मामलों में संबंधित भू-स्वामी को केवल एक या दो बार नोटिस भेजे गए हैं। इसके बाद न तो कुर्की की कार्रवाई हुई और न ही किसी प्रकार की दंडात्मक प्रक्रिया अपनाई गई।


🏷️ हेडिंग 3: बड़े बकाएदारों पर कार्रवाई शून्य

सूत्रों के अनुसार कई प्रभावशाली और बड़े भू-स्वामी ऐसे हैं, जिन पर लाखों रुपये का डायवर्सन शुल्क बकाया है। इसके बावजूद उनके विरुद्ध किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।


🏷️ हेडिंग 4: सख्ती के अभाव में लोग बेखौफ

प्रशासनिक सख्ती न होने के कारण लोग बिना शुल्क जमा किए ही व्यावसायिक निर्माण और अन्य गतिविधियां शुरू कर देते हैं। उन्हें यह भरोसा रहता है कि अधिक से अधिक नोटिस ही मिलेगा, वास्तविक कार्रवाई नहीं होगी।


🏷️ हेडिंग 5: नियमों की अनदेखी कर चल रहे निर्माण

शहर के कई इलाकों में कृषि भूमि पर डायवर्सन कराए बिना ही मकान, दुकान और व्यावसायिक परिसर बन चुके हैं। नियमानुसार पहले डायवर्सन शुल्क जमा करना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।


🏷️ हेडिंग 6: राजस्व को हो रहा बड़ा नुकसान

डायवर्सन शुल्क की वसूली न होने से शासन को सीधे तौर पर राजस्व हानि हो रही है। यह राशि शहरी विकास, सड़क, जलापूर्ति और अन्य मूलभूत सुविधाओं में खर्च की जा सकती थी।


🏷️ हेडिंग 7: प्रशासनिक तंत्र पर उठ रहे सवाल

लगातार बढ़ते बकाये और कार्रवाई के अभाव को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि छोटे बकाएदारों पर भी सख्ती नहीं हो रही है, तो बड़े मामलों में कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जाए।


🏷️ हेडिंग 8: राज्य स्तर पर निगरानी की मांग

विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे छत्तीसगढ़ में डायवर्सन मामलों की विशेष समीक्षा की जाए और बड़े बकाएदारों के विरुद्ध अभियान चलाकर वसूली सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

Facebook
Twitter
LinkedIn
Pinterest
WhatsApp
Leave a Comment
- Advertisement -
Vastugurujivastuguruji

Recent News

Vastu Products

VastuGuruji Products
INDRA DEV 9″
INDRA DEV 9″
🛒 Read More Details
Power of Infinity
Power of Infinity
🛒 Read More Details
Vastu Chakra
Vastu Chakra 
🛒 Read More Details

शादियों का सीजन शुरू, सिलेंडर के लिए फूड विभाग को दूसरा निमंत्रण

रायपुर में शादी सीजन शुरू होते ही लोग भगवान के बाद खाद्य…

महतारी वंदन योजना में अव्यवस्था, धूप में परेशान महिलाएं

रायपुर में महतारी वंदन योजना के दौरान अव्यवस्था, राशन स्टॉक की कमी…

एलपीजी की जमाखोरी रोकने 419 छापेमारी, बुकिंग में आई भारी गिरावट

रायपुर में एलपीजी जमाखोरी रोकने 419 छापेमारी, अफवाह से मार्च में बुकिंग…