छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के प्रचार पर फोकस, मई से 53 हजार प्राइमरी शिक्षक ड्यूटी पर, 31 लाख बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर शासन स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बार जनगणना में केवल आंकड़ों के संग्रह तक सीमित न रहकर व्यापक जन-जागरूकता और प्रचार-प्रसार पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थ लगभग 53 हजार शिक्षकों को आगामी मई माह से जनगणना से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों में लगाया जाएगा।
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन शिक्षकों को घर-घर जाकर जानकारी देने, सर्वे कार्य, प्रारंभिक सत्यापन और जनगणना से संबंधित प्रचार गतिविधियों में लगाया जाना है। इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।
31 लाख से अधिक बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर
प्रदेश में प्राथमिक स्तर पर अध्ययनरत लगभग 31 लाख बच्चों की पढ़ाई पर इस निर्णय का सीधा असर पड़ने की संभावना है। मई माह से जब बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना ड्यूटी पर रहेंगे, तब नियमित कक्षाएं प्रभावित होंगी। खास तौर पर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में, जहां पहले से ही शिक्षकों की संख्या सीमित है, वहां शिक्षण व्यवस्था पर अधिक दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि पहले ही स्कूलों में शैक्षणिक कार्य, परीक्षा कार्य, ऑनलाइन पोर्टल अपडेट, सर्वे और विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भार शिक्षकों पर है। अब जनगणना जैसी बड़ी प्रक्रिया में लंबे समय तक ड्यूटी लगाए जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होना तय है।
जनगणना 2027 में जन-जागरूकता पर विशेष जोर
इस बार जनगणना 2027 के लिए शासन द्वारा यह तय किया गया है कि लोगों को पहले से ही जनगणना की प्रक्रिया, जानकारी की गोपनीयता और सही विवरण देने के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसी उद्देश्य से स्कूल शिक्षकों को ‘फील्ड लेवल कम्युनिकेटर’ की भूमिका दी जा रही है, ताकि वे अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को सही जानकारी दे सकें।
अधिकारियों का कहना है कि कई बार गलत जानकारी, अपूर्ण विवरण और भ्रम के कारण जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी समस्या से बचने के लिए प्रचार और प्रशिक्षण पर इस बार विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मई से शुरू होगी ड्यूटी और प्रशिक्षण
सूत्रों के अनुसार मई से शिक्षकों का चरणबद्ध प्रशिक्षण प्रारंभ होगा। इसके बाद उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में जनगणना से संबंधित सर्वे और जन-जागरूकता गतिविधियों में लगाया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल डिवाइस के उपयोग, ऑनलाइन डेटा एंट्री और फील्ड रिपोर्टिंग की भी जानकारी दी जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
शिक्षाविदों और अभिभावकों का कहना है कि मई-जून का समय बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान नया शैक्षणिक सत्र शुरू होता है और बुनियादी पढ़ाई की नींव रखी जाती है। यदि इसी समय शिक्षकों की बड़ी संख्या प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहेगी, तो इसका असर सीधे बच्चों की सीखने की प्रक्रिया पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था के संतुलन पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि किसी एक क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
शिक्षक संगठनों और अभिभावक संघों की ओर से मांग उठाई जा रही है कि जनगणना ड्यूटी के दौरान स्कूलों में वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था की जाए या कार्य को चरणबद्ध तरीके से इस प्रकार संचालित किया जाए कि सभी शिक्षक एक साथ स्कूल से बाहर न रहें।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है और इसके सफल संचालन में सभी विभागों का सहयोग आवश्यक होता है। शिक्षकों को इसलिए चुना जाता है क्योंकि वे क्षेत्र से जुड़े होते हैं, प्रशिक्षित होते हैं और लोगों से संवाद स्थापित करने में सक्षम होते हैं। साथ ही यह भी प्रयास किया जाएगा कि स्कूलों की पढ़ाई पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
प्रदेश में जनगणना 2027 को लेकर शुरू हुई यह तैयारियां आने वाले समय में शिक्षा और प्रशासन दोनों क्षेत्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ सकती हैं।

