रायपुर में बदहाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्री परेशान हैं। खटारा सिटी बसें, बस स्टैंड व सुविधाओं की कमी से मध्यम वर्ग मजबूर होकर सफर कर रहा है।
रायपुर। राजधानी रायपुर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम लगातार बदहाली की ओर बढ़ता जा रहा है। शहर की सिटी बसें जर्जर हालत में हैं, बस स्टैंड और यात्री सुविधाओं का अभाव है और समय-सारिणी भी लगभग बेअसर हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग मजबूरी में सिटी बसों से सफर कर रहे हैं, जबकि संपन्न वर्ग धीरे-धीरे सार्वजनिक परिवहन से दूरी बना रहा है।
शहर में प्रतिदिन लाखों लोग काम, शिक्षा और इलाज के लिए सफर करते हैं, लेकिन भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अभाव में निजी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं पर पड़ रहा है।
खटारा बसों से चल रहा सिस्टम
रायपुर की अधिकतर सिटी बसें अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं। कई बसों की सीटें टूटी हुई हैं, दरवाजे ठीक से बंद नहीं होते और कई बसों में एयर वेंटिलेशन तक की उचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी के मौसम में यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
यात्रियों का कहना है कि कई बार बीच रास्ते में बस खराब हो जाती है, जिससे समय पर दफ्तर या स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
न बस स्टैंड, न बुनियादी सुविधा
शहर के कई प्रमुख रूटों पर आज भी व्यवस्थित बस स्टैंड नहीं हैं। यात्रियों को खुले मैदान या सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है। न बैठने की सुविधा है, न पीने के पानी की व्यवस्था और न ही शेड।
महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है।
समय-सारिणी सिर्फ कागजों में
सिटी बस संचालन के लिए तय टाइम-टेबल अधिकांश रूटों पर लागू ही नहीं हो पा रहा है। कई रूटों पर घंटों तक बस नहीं मिलती, तो कहीं एक साथ दो-तीन बसें आ जाती हैं। यात्रियों को न तो रियल टाइम जानकारी मिलती है और न ही किसी हेल्पडेस्क की सुविधा।
मध्यम वर्ग मजबूर, अपर क्लास दूर
मध्यम वर्ग के लोग आज भी सस्ती यात्रा के लिए सिटी बसों पर निर्भर हैं, लेकिन खराब सुविधा के कारण सफर तनावपूर्ण हो गया है। दूसरी ओर, निजी वाहन रखने वाले और उच्च आय वर्ग के लोग सार्वजनिक परिवहन से दूरी बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अपर और मध्यम वर्ग दोनों पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अपनाएं, तभी शहरी परिवहन व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
निजी वाहनों से बढ़ रहा दबाव
पब्लिक ट्रांसपोर्ट कमजोर होने के कारण लोग दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। इससे शहर की सड़कों पर दबाव बढ़ गया है। कई प्रमुख चौक और मार्ग दिनभर जाम की स्थिति से जूझते रहते हैं।
ट्रैफिक विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर साल शहर में पंजीकृत निजी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों की राय
शहरी परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रायपुर में जल्द आधुनिक बसें, इलेक्ट्रिक बसें, स्मार्ट बस स्टॉप और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और खराब हो जाएगी।
उनका सुझाव है कि—
- नए बस कॉरिडोर विकसित किए जाएं
- सभी प्रमुख रूटों पर स्मार्ट बस स्टॉप बनाए जाएं
- बसों में जीपीएस और लाइव ट्रैकिंग अनिवार्य हो
- महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित सुविधाएं बढ़ाई जाएं
प्रशासन से बड़ी उम्मीद
शहरवासियों को उम्मीद है कि नगर निगम और परिवहन विभाग मिलकर जल्द ठोस योजना तैयार करेंगे, ताकि रायपुर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम आधुनिक और भरोसेमंद बन सके।
यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो शहर में ट्रैफिक, प्रदूषण और अव्यवस्था की समस्या और गंभीर होती जाएगी।

