रायपुर में 2008 में शुरू हुई सिटी बस सेवा फेल साबित हुई। 100 बसों से घटकर 36 रह गईं, बस स्टैंड सहित 10 रूटों पर बस बंद।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2008 में शुरू की गई सिटी बस सेवा अब अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। करीब 17 साल पहले 100 सिटी बसों के साथ शुरू हुई इस योजना से शहरवासियों को सुगम और सस्ती यात्रा की उम्मीद जगी थी, लेकिन समय के साथ किए गए लगभग सभी प्रयोग असफल साबित हुए। वर्तमान स्थिति यह है कि शहर में अब महज 36 सिटी बसें ही संचालन में बची हैं, जबकि बस स्टैंड सहित 10 प्रमुख रूटों पर बस सेवा पूरी तरह बंद हो चुकी है।
100 बसों से हुई थी मजबूत शुरुआत
रायपुर में सिटी बस सेवा की शुरुआत वर्ष 2008 में शहरी परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआती दौर में लगभग 100 बसें अलग-अलग प्रमुख मार्गों पर चलाई गईं, जिससे स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और आम यात्रियों को बड़ी राहत मिली थी।
उस समय शहर के कई इलाकों में निजी ऑटो और निजी वाहनों की निर्भरता कम होने लगी थी।
समय के साथ घटता गया बेड़ा
कुछ ही वर्षों में रखरखाव, संचालन लागत, तकनीकी समस्याएं और प्रबंधन की कमजोरियों के कारण बसों की संख्या धीरे-धीरे घटती चली गई। पुराने होते वाहनों की मरम्मत समय पर नहीं हो सकी और कई बसें कबाड़ में तब्दील होती चली गईं।
आज स्थिति यह है कि करीब 100 बसों का बेड़ा सिमटकर केवल 36 बसों तक रह गया है।
10 रूटों पर पूरी तरह बंद हुई सेवा
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि शहर के बस स्टैंड सहित करीब 10 महत्वपूर्ण रूटों पर अब सिटी बसें चल ही नहीं रही हैं। इन रूटों पर पहले बड़ी संख्या में यात्री सफर करते थे, लेकिन अब उन्हें मजबूरी में ऑटो, निजी वाहन या महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बस स्टैंड जैसे प्रमुख केंद्र तक बस सेवा का बंद होना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
यात्रियों की परेशानी बढ़ी
सिटी बसों की संख्या घटने और रूट बंद होने से आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खासकर छात्र, मजदूर, बुजुर्ग और कम आय वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
लोगों का कहना है कि निजी साधनों का खर्च हर दिन बढ़ता जा रहा है और सभी के लिए बाइक या कार रखना संभव नहीं है।
ट्रैफिक और प्रदूषण भी बढ़ा
सार्वजनिक परिवहन कमजोर होने का सीधा असर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ा है। लोग मजबूरी में निजी दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीद रहे हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ और प्रदूषण दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सिटी बस सेवा मजबूत होती तो शहर में हजारों निजी वाहन कम हो सकते थे।
कई मॉडल बदले, लेकिन नहीं मिली सफलता
बीते वर्षों में बस संचालन के लिए अलग-अलग एजेंसियों और मॉडल के जरिए प्रयोग किए गए, लेकिन कोई भी मॉडल लंबे समय तक सफल नहीं हो सका। कभी संचालन निजी हाथों में दिया गया, तो कभी नगर निगम और एजेंसी के संयुक्त मॉडल पर काम हुआ।
प्रबंधन की कमजोरियों और वित्तीय घाटे के कारण योजनाएं बार-बार बदलती रहीं।
ई-बस से नई उम्मीद
हाल ही में रायपुर और नवा रायपुर के बीच ई-बस सेवा शुरू करने की योजना सामने आई है। इससे शहरवासियों को एक बार फिर उम्मीद बंधी है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा और लोगों को बेहतर, सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प मिल सकेगा।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई बसें लाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि रूट प्लानिंग, समय-सारणी और नियमित मॉनिटरिंग भी उतनी ही जरूरी होगी।
मजबूत नीति की जरूरत
शहर के जानकारों का कहना है कि रायपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देना अब अनिवार्य हो गया है। यदि जल्द ठोस और दीर्घकालिक नीति नहीं बनाई गई, तो आने वाले वर्षों में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।

