रायपुर में कमजोर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के कारण निजी वाहन बढ़े। रोज लाखों लोग शहर पहुंचते हैं, बस सेवा मजबूत होगी तो ट्रैफिक दबाव कम होगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लगातार बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक अब आम जनता के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। रोजाना लाखों की संख्या में लोग काम, व्यापार, शिक्षा और इलाज के लिए रायपुर पहुंचते हैं, लेकिन मजबूत और भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के अभाव में लोग निजी वाहनों पर निर्भर होने को मजबूर हैं। यही कारण है कि शहर की सड़कों पर कार और दोपहिया वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और ट्रैफिक का दबाव दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है।
शहर के प्रमुख चौराहों, बाजार क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों के आसपास सुबह से लेकर देर शाम तक जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। ऑफिस टाइम और स्कूल-कॉलेज की छुट्टी के समय हालात और ज्यादा बिगड़ जाते हैं।
रोजाना लाखों लोगों का होता है आवागमन
प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र होने के कारण रायपुर में आसपास के जिलों के अलावा नवा रायपुर, दुर्ग-भिलाई, महासमुंद, बलौदाबाजार और राजनांदगांव जैसे क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग रोजाना आते-जाते हैं। इसमें सरकारी कर्मचारी, छात्र, व्यापारी, मरीज और श्रमिक वर्ग शामिल हैं।
इतनी बड़ी आबादी के आवागमन के लिए पर्याप्त बस सेवा और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अभी तक विकसित नहीं हो पाई है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट कमजोर, निजी वाहन मजबूरी
शहर में सीमित रूट पर चलने वाली बसों की संख्या कम है। कई प्रमुख इलाकों और कॉलोनियों तक सीधी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। समय पर बस न मिल पाने के कारण लोग बाइक, स्कूटर और कार से यात्रा करना ज्यादा सुविधाजनक मानने लगे हैं।
यही वजह है कि हर साल हजारों नए निजी वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं।
ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों बढ़े
निजी वाहनों की बढ़ती संख्या से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ी है, बल्कि वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। कई प्रमुख सड़कों पर सुबह और शाम के समय औसत गति बेहद कम हो जाती है।
लोगों का कहना है कि 5 से 7 किलोमीटर का सफर तय करने में भी 30 से 40 मिनट तक लग जाते हैं।
बस सेवा मजबूत होगी तो कम होगा दबाव
ट्रैफिक और परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहर में प्रभावी, नियमित और भरोसेमंद बस सेवा शुरू की जाए, तो बड़ी संख्या में लोग निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन को अपनाने के लिए तैयार हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हर 40–50 यात्रियों को ले जाने वाली एक बस सड़कों से लगभग 25 से 30 निजी वाहनों का भार कम कर सकती है।
रूट प्लानिंग और फ्रीक्वेंसी पर जोर जरूरी
शहरवासियों की मांग है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों, नई कॉलोनियों, नवा रायपुर कनेक्टिविटी, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, एयरपोर्ट और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ते हुए नए रूट तैयार किए जाएं।
साथ ही सुबह और शाम के पीक टाइम में बसों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि लोगों को लंबा इंतजार न करना पड़े।
ई-बस से उम्मीद, लेकिन अभी इंतजार
हाल ही में रायपुर और नवा रायपुर के बीच ई-बस संचालन की योजनाओं की घोषणा हुई है, जिससे लोगों को उम्मीद बंधी है कि आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा। हालांकि फिलहाल इसका लाभ आम जनता को पूरी तरह से मिलना बाकी है।
पार्किंग और अव्यवस्थित ट्रैफिक भी बड़ी समस्या
शहर में कई जगहों पर अवैध पार्किंग और संकरी सड़कों के कारण भी ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा है। यदि बस सेवा बेहतर होती है, तो सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और पार्किंग की समस्या में भी राहत मिलेगी।
आम लोगों की मांग
शहरवासियों का कहना है कि रायपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में अब मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम बेहद जरूरी हो गया है। केवल फ्लाईओवर और चौड़ी सड़कों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि बस, ई-बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन विकल्पों को प्राथमिकता देनी होगी।

