एकलव्य विद्यालय प्राचार्य भर्ती में 100 में 1 अंक पाने वाले भी दूसरे चरण में चयनित, मेरिट और पारदर्शिता पर सवाल, अभ्यर्थियों में नाराजगी।
रायपुर। राज्य में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्राचार्य (प्रिंसिपल) पदों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लिखित परीक्षा में 100 में सिर्फ 1 अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को भी दूसरे चरण की चयन प्रक्रिया के लिए बुलाए जाने से भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।
जानकारी के अनुसार, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्राचार्य पदों की भर्ती के लिए राज्य स्तर पर लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरे चरण में साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया तय की गई थी। लेकिन सूची में ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें लिखित परीक्षा में बेहद कम अंक मिले थे, फिर भी उन्हें अगले चरण के लिए पात्र घोषित कर दिया गया।
मेरिट पर सवाल, अभ्यर्थियों में नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों को मात्र एक अंक प्राप्त होने के बावजूद इंटरव्यू राउंड के लिए बुलाया गया है। वहीं दूसरी ओर, बेहतर अंक लाने वाले कई अभ्यर्थियों का नाम चयन सूची से बाहर बताया जा रहा है। इससे परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि इतने कम अंक लाने वाले भी चयन के अगले चरण में जा सकते हैं, तो लिखित परीक्षा का औचित्य ही खत्म हो जाता है। उन्होंने मांग की है कि पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मेरिट के आधार पर ही चयन सूची तैयार की जाए।
कटऑफ तय न होने का आरोप
भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों का आरोप है कि लिखित परीक्षा के बाद कोई स्पष्ट कटऑफ तय नहीं किया गया। इसी वजह से चयन सूची में असमानता दिखाई दे रही है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि नियमों के अनुरूप न्यूनतम अर्हता अंक निर्धारित किए बिना ही दूसरे चरण के लिए सूची जारी कर दी गई।
विभागीय स्तर पर जांच की तैयारी
मामला तूल पकड़ने के बाद विभागीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया तय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही की गई है, लेकिन सामने आई शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि यदि गड़बड़ी पाई जाती है, तो चयन सूची में संशोधन भी किया जा सकता है। वहीं, अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव स्तर तक शिकायत पहुंचाने की तैयारी भी कर ली है।
एकलव्य विद्यालयों में रिक्त पदों का संकट
गौरतलब है कि राज्य में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण संस्थान हैं। लंबे समय से कई विद्यालयों में प्राचार्य पद रिक्त हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे तौर पर शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
शिक्षाविदों का मानना है कि प्राचार्य जैसे जिम्मेदार पदों पर चयन पूरी तरह योग्यता और अनुभव के आधार पर होना चाहिए, ताकि विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार किया जा सके।
पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
भर्ती प्रक्रिया में सामने आए इस विवाद के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि पूरी चयन प्रक्रिया, प्राप्त अंकों की सूची और चयन मानदंड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी तरह की शंका का समाधान हो सके।
अब सभी की नजरें विभाग की अगली कार्रवाई और संभावित जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

