एआई जांच में छत्तीसगढ़ की 65 लाख वोटर आईडी में गड़बड़ी सामने आई, निर्वाचन आयोग ने 14 फरवरी से पहले सभी रिकॉर्ड सुधारने के निर्देश जारी किए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया गया है। एआई आधारित जांच में प्रदेशभर की करीब 65 लाख वोटर आईडी में नाम, उम्र, पता और अन्य विवरण से जुड़ी छोटी-छोटी गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए 14 फरवरी से पहले डेटा सुधारने के निर्देश दिए हैं।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा के भीतर सुधार नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
एआई तकनीक से हुई डिजिटल जांच
मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए पहली बार प्रदेश स्तर पर एआई आधारित सॉफ्टवेयर के जरिए डेटा एनालिसिस किया गया। इस प्रणाली ने लाखों रिकॉर्ड का मिलान कर नामों की वर्तनी, जन्म तिथि, लिंग, पता, फोटो और दोहरे पंजीयन जैसी त्रुटियों की पहचान की।
अधिकारियों के मुताबिक यह गड़बड़ियां भले ही छोटी दिखाई देती हों, लेकिन चुनाव प्रक्रिया के दौरान यही त्रुटियां बड़ी परेशानी का कारण बनती हैं।
किन तरह की गड़बड़ियां मिलीं
एआई रिपोर्ट में सामने आया है कि बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड में—
- नाम की स्पेलिंग में अंतर
- पिता या पति के नाम में गलती
- उम्र और जन्म तिथि का मेल नहीं होना
- पते में अधूरी जानकारी
- एक ही व्यक्ति का एक से अधिक जगह पंजीयन
- फोटो और विवरण का मिलान न होना
जैसी खामियां पाई गई हैं।
आयोग ने सभी जिलों को भेजा नोटिस
रायपुर स्थित राज्य निर्वाचन कार्यालय से सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को औपचारिक नोटिस जारी किया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और निर्वाचन शाखा के कर्मचारियों के माध्यम से सभी चिन्हित रिकॉर्ड का सत्यापन कर 14 फरवरी तक संशोधन पूरा किया जाए।
साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि सुधार कार्य का डिजिटल प्रमाण पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
क्यों जरूरी है समय पर सुधार
निर्वाचन आयोग का मानना है कि त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होती है। कई बार गलत उम्र या पते की वजह से मतदाता को मतदान केंद्र पर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा दोहरे नाम और गलत प्रविष्टियां राजनीतिक विवाद और शिकायतों की वजह भी बनती हैं। इसी को देखते हुए आयोग इस बार समय रहते डेटा शुद्धिकरण पर जोर दे रहा है।
रायपुर समेत सभी जिलों में तेज हुआ सत्यापन अभियान
नोटिस मिलने के बाद रायपुर सहित सभी जिलों में मतदाता सूची सुधार अभियान को तेज कर दिया गया है। बीएलओ अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर और ऑनलाइन माध्यम से रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
निर्वाचन शाखा के अधिकारियों के अनुसार जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई है, उनसे संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज लिए जा रहे हैं ताकि सही जानकारी दर्ज की जा सके।
नागरिकों से भी सहयोग की अपील
निर्वाचन आयोग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने वोटर आईडी कार्ड और मतदाता सूची में दर्ज विवरण की जांच जरूर करें। यदि किसी को नाम, पता, उम्र या फोटो से जुड़ी कोई गलती नजर आती है, तो वे तत्काल ऑनलाइन पोर्टल या अपने नजदीकी बीएलओ से संपर्क कर सुधार आवेदन दें।
आयोग का कहना है कि नागरिकों के सहयोग से ही मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध बनाया जा सकता है।
भविष्य में और मजबूत होगी डिजिटल निगरानी
राज्य निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को भविष्य में और अधिक उन्नत बनाया जाएगा। इससे हर अपडेट के बाद डेटा का स्वतः विश्लेषण होगा और किसी भी तरह की असंगति तुरंत सामने आ जाएगी।
इससे चुनाव से ठीक पहले भारी संख्या में सुधार कार्य करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
लापरवाही पर होगी जवाबदेही तय
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समयसीमा तक सुधार कार्य पूरा नहीं हुआ या गलत जानकारी बनी रही, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

