स्वच्छता सर्वेक्षण-2025 में रायपुर-बिलासपुर समेत दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में फील्ड जांच, नागरिक फीडबैक और कचरा प्रबंधन के आधार पर तय होगी ग्रेडिंग।
रायपुर | केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत वर्ष 2025 के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार रायपुर और बिलासपुर समेत देश के उन सभी शहरों में विशेष रूप से व्यापक जांच की जा रही है, जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। सर्वेक्षण के आधार पर ही शहरों की स्वच्छता रैंकिंग और ग्रेडिंग तय की जाएगी।
स्वच्छता सर्वेक्षण-2025 के अंतर्गत नगर निगमों के कामकाज, साफ-सफाई की व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, नागरिक सहभागिता और नवाचारों की बारीकी से जांच की जा रही है। रायपुर और बिलासपुर नगर निगम को इस बार विशेष श्रेणी में रखा गया है, जहां निरीक्षण के मानक और भी कड़े बनाए गए हैं।
शहरों की ग्रेडिंग तय करेगा फील्ड सर्वे
अधिकारियों के अनुसार इस बार केवल दस्तावेजों और ऑनलाइन रिपोर्टिंग के आधार पर नहीं, बल्कि फील्ड लेवल पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी। केंद्रीय टीम शहर के प्रमुख बाजार, रिहायशी इलाके, स्लम क्षेत्र, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल और सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण करेगी।
इसी फील्ड सर्वे के आधार पर यह तय होगा कि शहर को किस श्रेणी और ग्रेड में रखा जाएगा।
रायपुर-बिलासपुर पर रहेगी खास नजर
छत्तीसगढ़ के दो बड़े शहर रायपुर और बिलासपुर पहले भी स्वच्छता रैंकिंग में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं, लेकिन इस बार दोनों नगर निगमों के लिए चुनौती और भी बड़ी है। आबादी, क्षेत्रफल और बढ़ते कचरे के दबाव के चलते इन शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, डोर-टू-डोर कलेक्शन और सेग्रीगेशन की गुणवत्ता को प्रमुख मानक बनाया गया है।
नगर निगम रायपुर के अधिकारियों ने बताया कि वार्ड स्तर पर निगरानी टीमें गठित की गई हैं, जो रोजाना साफ-सफाई व्यवस्था की रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।
कचरा प्रबंधन और सेग्रीगेशन पर जोर
स्वच्छता सर्वेक्षण-2025 में इस बार गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को बेहद महत्वपूर्ण पैरामीटर माना गया है। घर-घर से कचरा संग्रहण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ), कम्पोस्टिंग यूनिट और कचरा प्रोसेसिंग प्लांट की कार्यप्रणाली का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि नागरिक वास्तव में कचरे को अलग-अलग करके दे रहे हैं या नहीं।
सार्वजनिक शौचालय और सामुदायिक सुविधाएं भी जांच के दायरे में
सर्वेक्षण टीम सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की साफ-सफाई, पानी की उपलब्धता, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं और रखरखाव की स्थिति का भी निरीक्षण करेगी।
रायपुर और बिलासपुर में स्मार्ट टॉयलेट, ई-टॉयलेट और पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया है।
नागरिक फीडबैक बनेगा अहम आधार
इस बार नागरिकों से सीधे फीडबैक लेने की प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है। मोबाइल ऐप, कॉल और फील्ड इंटरव्यू के जरिए लोगों से पूछा जाएगा कि उनके क्षेत्र में साफ-सफाई की व्यवस्था कैसी है, कचरा समय पर उठता है या नहीं, और शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है।
नागरिकों की राय शहर की ग्रेडिंग को सीधे प्रभावित करेगी।
अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
राज्य स्तर पर नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी बड़े नगर निगमों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। साफ-सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति, मशीनों की उपलब्धता, कचरा परिवहन वाहनों की कार्यशील स्थिति और निगरानी प्रणाली को दुरुस्त रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
साथ ही स्वच्छता से जुड़े सभी रिकॉर्ड और डिजिटल डाटा को अपडेट रखने को कहा गया है।
बेहतर रैंकिंग से मिलेगी अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि
स्वच्छता सर्वेक्षण-2025 में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को केंद्र सरकार द्वारा विशेष प्रोत्साहन राशि और पुरस्कार भी दिए जाएंगे। इससे शहरों को आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और नई स्वच्छता परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन मिल सकेंगे।
आमजन से सहयोग की अपील
नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे घरों में कचरा अलग-अलग रखें, खुले में कचरा न फेंकें, सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न करें और सर्वेक्षण टीम के सामने सही फीडबैक दें, ताकि शहर की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

