उदंती-सीतानदी में दिखा दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन, वन रक्षक ने कैमरे में किया कैद

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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन दिखा, वन रक्षक ने कैमरे में कैद कर रिकॉर्ड बनाया।

रायपुर | छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन (Peregrine Falcon) देखे जाने से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग में खासा उत्साह है। यह दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति का पक्षी एक वन रक्षक द्वारा कैमरे में कैद किया गया है।

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यह पक्षी उदंती-सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र के खुले जंगल और जल स्रोत के आसपास देखा गया। गश्त के दौरान तैनात वन रक्षक ने इसे उड़ान भरते हुए देखा और तत्काल अपने कैमरे से इसकी तस्वीरें लीं। बाद में पक्षी विशेषज्ञों द्वारा तस्वीरों की पुष्टि के बाद इसे पेरेग्रीन फाल्कन बताया गया।

दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी

पेरेग्रीन फाल्कन को दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी माना जाता है। यह शिकार के दौरान हवा में गोता लगाते समय 300 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। यही वजह है कि इसे ‘एयर का सबसे तेज शिकारी’ भी कहा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार पेरेग्रीन फाल्कन आमतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों, चट्टानों, ऊंची इमारतों और खुले इलाकों में पाया जाता है। यह पक्षी प्रवासी प्रजाति में भी शामिल है और सर्दियों के मौसम में कई बार भारत के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देता है।

उदंती-सीतानदी के लिए महत्वपूर्ण रिकॉर्ड

वन अधिकारियों ने बताया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पेरेग्रीन फाल्कन का दिखना जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह साबित होता है कि यह क्षेत्र केवल स्तनधारी वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ और संरक्षित पक्षी प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आवास बना हुआ है।

उदंती-सीतानदी क्षेत्र पहले से ही भालू, तेंदुआ, जंगली सुअर, हिरण और कई दुर्लभ पक्षियों के लिए जाना जाता है। अब पेरेग्रीन फाल्कन की मौजूदगी ने इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी महत्ता को और बढ़ा दिया है।

वन रक्षक की सतर्कता से हुआ दस्तावेजीकरण

वन विभाग ने बताया कि नियमित गश्त के दौरान सतर्कता बरतते हुए वन रक्षक ने इस पक्षी की तस्वीर ली, जिससे इसकी आधिकारिक रिकॉर्डिंग संभव हो पाई। विभाग ने वन रक्षक की सराहना करते हुए कहा कि फील्ड स्टाफ की सक्रियता से वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

तस्वीरों को विभागीय रिकॉर्ड में शामिल किया जा रहा है और भविष्य में इस क्षेत्र में विशेष बर्ड सर्वे कराने की योजना भी बनाई जा रही है।

प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी का संकेत

विशेषज्ञों का कहना है कि पेरेग्रीन फाल्कन का दिखना इस बात का संकेत है कि उदंती-सीतानदी क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल बन रहा है। इससे पर्यटन और प्रकृति अध्ययन को भी बढ़ावा मिलेगा।

वन विभाग ने आम नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि यदि वे किसी दुर्लभ पक्षी या वन्यजीव को देखें तो उसे परेशान न करें और न ही उसके बहुत पास जाकर फोटो लेने की कोशिश करें।

बर्ड वॉचिंग के लिए बढ़ेगा आकर्षण

वन अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में उदंती-सीतानदी क्षेत्र बर्ड वॉचिंग और ईको-टूरिज्म के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। पेरेग्रीन फाल्कन जैसी प्रजाति की मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस क्षेत्र की पहचान मजबूत हो सकती है।

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