हाईकोर्ट ने कहा कोर्ट कर्मचारी रेगुलर स्टूडेंट की तरह पढ़ाई नहीं कर सकते, दी गई अनुमति रद्द, कामकाज और प्रशासनिक अनुशासन पर असर बताया।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कोर्ट कर्मचारी नियमित छात्र (रेगुलर स्टूडेंट) की तरह पढ़ाई नहीं कर सकते। अदालत ने एक कर्मचारी को नियमित कॉलेज में पढ़ाई की दी गई अनुमति को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि इससे न्यायालय के कामकाज और प्रशासनिक अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
यह आदेश बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा पारित किया गया है।
कर्मचारी को दी गई अनुमति की गई रद्द
मामले में संबंधित कर्मचारी को पहले नियमित कॉलेज में अध्ययन करने की अनुमति दी गई थी। बाद में यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा, जहां अनुमति की वैधता को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने अनुमति को निरस्त करते हुए कहा कि न्यायालयीन सेवा में कार्यरत कर्मचारियों से पूर्णकालिक कार्य अपेक्षित होता है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि न्यायिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों का समय, उपस्थिति और कार्य अनुशासन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि कर्मचारी रेगुलर छात्र की तरह कॉलेज जाकर पढ़ाई करेंगे, तो इससे कार्यालयीन व्यवस्था प्रभावित होगी।
कामकाज और प्रशासनिक अनुशासन पर असर
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि ऐसी अनुमति से:
- कार्यालयीन कार्य प्रभावित होंगे
- समयपालन में बाधा आएगी
- न्यायालयीन कार्यों में विलंब होगा
- प्रशासनिक अनुशासन कमजोर पड़ेगा
सेवा शर्तों का पालन जरूरी
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सभी कर्मचारियों को सेवा शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। व्यक्तिगत शैक्षणिक हितों के लिए विभागीय दायित्वों से समझौता नहीं किया जा सकता।
न्यायालयीन सेवाओं की विशेष प्रकृति
अदालत ने कहा कि न्यायालयीन सेवाएं सामान्य विभागों से अलग होती हैं, जहां:
- संवेदनशील फाइलों का कार्य
- न्यायिक रिकॉर्ड का संधारण
- समयबद्ध कार्यप्रणाली
अत्यंत आवश्यक होती है।
डिस्टेंस या वैकल्पिक माध्यम की छूट संभव
हालांकि अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि कर्मचारी नियमों के अनुरूप, ड्यूटी प्रभावित किए बिना दूरस्थ शिक्षा या वैकल्पिक माध्यम से अध्ययन करते हैं, तो उस पर विभाग स्तर पर विचार किया जा सकता है।
भविष्य के मामलों के लिए अहम फैसला
यह फैसला भविष्य में कोर्ट कर्मचारियों की पढ़ाई से जुड़ी अनुमति के मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

