रायपुर एक्सप्रेस-वे किनारे जर्जर नाली पाटों पर पीडब्ल्यूडी ने 40 लाख की दीवार खड़ी कर दी, इंजीनियरिंग गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल।
रायपुर। राजधानी रायपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक्सप्रेस-वे के किनारे नाली को ढंकने के लिए करीब 10 साल पहले बनाए गए पाट (कवर स्लैब) अब जर्जर अवस्था में हैं, लेकिन इन्हें हटाने या नए सिरे से निर्माण करने के बजाय विभाग ने इन्हीं टूटते पाटों के ऊपर लगभग 40 लाख रुपए की दीवार खड़ी कर दी। इस फैसले को लेकर अब इंजीनियरिंग गुणवत्ता, सुरक्षा और सरकारी धन के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जर्जर पाटों पर भारी-भरकम दीवार
स्थानीय लोगों के अनुसार—
- नाली ढंकने के लिए बनाए गए पाटों में जगह-जगह दरारें
- कई पाट नीचे से धंस चुके हैं
- बारिश के दौरान पानी भरने से स्थिति और खराब
इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी ने बिना स्ट्रक्चरल ऑडिट कराए इन्हीं पाटों के ऊपर कंक्रीट की ऊंची दीवार बना दी।
40 लाख खर्च, लेकिन सुरक्षा पर संदेह
जानकारों का कहना है कि—
- जर्जर पाटों की भार वहन क्षमता बेहद कम
- ऊपर बनाई गई दीवार का वजन भविष्य में बड़ा हादसा कर सकता है
- यदि पाट टूटे तो दीवार सीधे नाली में गिर सकती है
ऐसी स्थिति में एक्सप्रेस-वे से गुजरने वाले वाहनों और राहगीरों की जान को खतरा है।
नियमों की अनदेखी का आरोप
निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि—
- किसी भी पुराने ढांचे पर नया निर्माण करने से पहले तकनीकी परीक्षण अनिवार्य होता है
- स्ट्रक्चरल सेफ्टी रिपोर्ट के बिना निर्माण नियमों के खिलाफ
- यह कार्य सरकारी निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि बिना जिम्मेदारी तय किए जल्दबाजी में दीवार खड़ी कर दी गई।
जनता में नाराजगी, जांच की मांग
इलाके के लोगों ने सवाल उठाए हैं—
- जब पाट खराब थे तो पहले उन्हें क्यों नहीं बदला गया?
- क्या भविष्य में नुकसान होने पर जिम्मेदारी तय होगी?
- 40 लाख रुपए खर्च करने से पहले योजना क्यों नहीं बनाई गई?
नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
पीडब्ल्यूडी की चुप्पी
इस मामले में—
- पीडब्ल्यूडी के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया गया
- लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला
- विभागीय चुप्पी संदेह को और गहरा रही है
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब—
- रायपुर में सड़क और नाली निर्माण को लेकर सवाल उठे हों
- पहले भी घटिया निर्माण और बिना प्लानिंग काम होने के आरोप लगे
- कई मामलों में मरम्मत के नाम पर दोबारा खर्च हुआ
क्या कहता है नियम?
तकनीकी मानकों के अनुसार—
- 10 साल पुराने स्लैब का दोबारा उपयोग तभी संभव, जब वे सुरक्षित घोषित हों
- भार बढ़ाने से पहले लोड टेस्ट अनिवार्य
- सुरक्षा को नजरअंदाज कर किया गया निर्माण गंभीर लापरवाही माना जाता है

