महानदी जल विवाद सुलझाने ओडिशा के डिप्टी सीएम केवी सिंह रायपुर आएंगे, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ उच्चस्तरीय बैठक करेंगे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। ओडिशा के उपमुख्यमंत्री केवी सिंह जल्द ही छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ इस संवेदनशील मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक करेंगे।
इस बैठक को दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर बने गतिरोध को तोड़ने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक रायपुर में आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, जल संसाधन विभाग के विशेषज्ञ और कानूनी सलाहकार भी मौजूद रहेंगे।
वर्षों पुराना है महानदी जल विवाद
महानदी छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा मानी जाती है, जो ओडिशा होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। पिछले कई वर्षों से दोनों राज्यों के बीच जल उपयोग, बांध निर्माण और जल प्रवाह को लेकर विवाद चला आ रहा है। विशेष रूप से ओडिशा द्वारा बैराज और जल संरचनाओं के निर्माण को लेकर छत्तीसगढ़ ने कई बार आपत्ति दर्ज कराई है।
छत्तीसगढ़ का आरोप रहा है कि ऊपरी हिस्से में बांध और बैराज बनने से राज्य के कई जिलों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल तक पहुंचा मामला
महानदी जल विवाद पहले ही ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। दोनों राज्यों ने अपने-अपने पक्ष मजबूती से रखे हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
छत्तीसगढ़ सरकार लगातार यह मांग करती रही है कि जल बंटवारे को लेकर पारदर्शी और न्यायसंगत समझौता होना चाहिए, जिससे दोनों राज्यों के हित सुरक्षित रह सकें।
बैठक से समाधान की उम्मीद
ओडिशा के डिप्टी मुख्यमंत्री केवी सिंह का यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब दोनों राज्यों के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर सीधे संवाद होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे संवाद और सहमति के रास्ते से विवाद सुलझाने के पक्षधर हैं।
बैठक में—
- जल बंटवारे के आंकड़ों की समीक्षा
- बांधों से जल छोड़े जाने का समय और मात्रा
- सिंचाई और पेयजल जरूरतों का आकलन
- भविष्य की जल परियोजनाओं पर सहमति
जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल
इस प्रस्तावित बैठक को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी खासा उत्साह है। माना जा रहा है कि यदि इस बैठक में किसी साझा फार्मूले पर सहमति बनती है, तो इससे दोनों राज्यों के लाखों किसानों और आम नागरिकों को राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपसी सहमति से समाधान निकलता है, तो यह संघीय ढांचे में राज्यों के बीच सहयोग का एक सकारात्मक उदाहरण होगा।
दोनों सरकारों की साझा जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ सरकार का मानना है कि महानदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक धरोहर है। इसका न्यायसंगत उपयोग ही दीर्घकालीन विकास का आधार बन सकता है।
अब सभी की निगाहें इस अहम बैठक पर टिकी हैं, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि वर्षों से चला आ रहा यह विवाद संवाद के माध्यम से समाधान की ओर बढ़ेगा।

