रायपुर रेलवे स्टेशन पर जान से खिलवाड़, बिना सेफ्टी गियर ऊंचाई पर झूलकर मजदूर कर रहे पेंटिंग

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रायपुर रेलवे स्टेशन पर बिना सेफ्टी गियर ऊंचाई पर पेंटिंग कर रहे मजदूर, गंभीर लापरवाही, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा।

रायपुर। देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल रायपुर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों गंभीर सुरक्षा लापरवाही सामने आई है। स्टेशन परिसर में ऊंचाई पर पेंटिंग का काम कर रहे मजदूर बिना किसी सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट या हार्नेस के झूलते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि किसी भी वक्त बड़ा हादसा होने का खतरा पैदा कर रहा है।

स्टेशन के प्लेटफॉर्म, शेड और दीवारों पर रंग-रोगन का कार्य जारी है, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ठेकेदार और रेलवे प्रशासन दोनों की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है।


बिना सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरा काम

स्थानीय लोगों और यात्रियों के अनुसार—

  • मजदूर कई फीट ऊंचाई पर रस्सियों के सहारे झूल रहे हैं
  • न तो हेलमेट है, न सेफ्टी बेल्ट
  • नीचे से ट्रेनों और यात्रियों की आवाजाही जारी रहती है
  • हल्की चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है

एक यात्री ने कहा, “ऊपर मजदूर झूल रहा है और नीचे लोग गुजर रहे हैं, अगर गिर गया तो उसकी जान भी जाएगी और दूसरों की भी।”


रेलवे नियमों की उड़ रही धज्जियां

रेलवे और श्रम विभाग के नियमों के अनुसार—

  • ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों को सेफ्टी हार्नेस अनिवार्य
  • हेलमेट, ग्लव्स और सेफ्टी जूते जरूरी
  • साइट पर सुपरवाइजर की मौजूदगी जरूरी
  • जोखिम भरे काम में सेफ्टी नेट लगाना अनिवार्य

लेकिन रायपुर स्टेशन पर इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।


ठेकेदार और प्रशासन पर उठे सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि—

  • ठेकेदार सिर्फ काम जल्दी पूरा करने पर जोर दे रहा है
  • मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए
  • किसी अधिकारी ने अब तक काम नहीं रुकवाया
  • निरीक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित है

इससे साफ है कि मजदूरों की जान की कीमत पर सौंदर्यीकरण किया जा रहा है


पहले भी हो चुके हैं हादसे

रेलवे परिसरों में पहले भी—

  • ऊंचाई से गिरकर मजदूरों की मौत
  • गंभीर चोट के कई मामले
  • मुआवजा और जांच के बाद मामला ठंडे बस्ते में

विशेषज्ञों का कहना है कि हर हादसे के बाद ही नियम याद आते हैं, लेकिन समय रहते रोकथाम नहीं होती।


मजदूरों की मजबूरी भी बड़ी वजह

मजदूरों का कहना है—

  • “अगर सेफ्टी मांगेंगे तो काम से निकाल देंगे”
  • रोजी-रोटी के लिए जोखिम उठाना मजबूरी है
  • ठेकेदार से सवाल करने की हिम्मत नहीं

यह स्थिति श्रमिक सुरक्षा कानूनों की विफलता को भी उजागर करती है।


अब क्या कार्रवाई होगी?

यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—

  • तुरंत काम रोका जाए
  • मजदूरों को पूरे सेफ्टी गियर दिए जाएं
  • ठेकेदार पर जुर्माना लगे
  • रेलवे अधिकारी मौके पर निरीक्षण करें

सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है?
क्या रेलवे प्रशासन तब ही जागेगा, जब कोई मजदूर अपनी जान गंवा देगा?

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