रायपुर में अवैध खनन पर बड़ा एक्शन, पर्यावरणीय नुकसान की जांच में उतरा राष्ट्रीय हरित अधिकरण

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रायपुर सहित छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन पर NGT सख्त, अफसरों की भूमिका की जांच, 42 दिन में मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक अमले की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन के मामलों को गंभीर मानते हुए एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों से 42 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

इस आदेश के बाद खनन विभाग, जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग में हलचल मच गई है।


क्या है पूरा मामला?

एनजीटी के समक्ष याचिका में आरोप लगाया गया था कि—

  • कई नदी घाटों से नियमों के खिलाफ बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है
  • पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना खनन हो रहा है
  • रात के अंधेरे में भारी वाहनों से रेत का परिवहन किया जा रहा है
  • स्थानीय प्रशासन जानबूझकर आंख मूंदे बैठा है

याचिका में यह भी कहा गया कि इससे—

  • नदियों का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है
  • भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है
  • नदी किनारे बसे गांवों को खतरा बढ़ रहा है

अफसरों की भूमिका की होगी जांच

एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि—

  • संबंधित जिला कलेक्टर
  • खनन अधिकारी
  • पर्यावरण विभाग के अफसर
  • पुलिस प्रशासन

सभी की भूमिका की जवाबदेही तय की जाएगी

एनजीटी ने पूछा है कि—

  • अवैध खनन की जानकारी होते हुए कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
  • कितनी शिकायतें आईं और उन पर क्या कार्रवाई हुई?
  • किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई?

42 दिन में मांगी गई रिपोर्ट

एनजीटी ने आदेश दिया है कि—

  • सभी संबंधित विभाग
  • संयुक्त जांच टीम गठित करें
  • मौके का निरीक्षण करें
  • अवैध खनन के सटीक आंकड़े दें
  • पर्यावरणीय क्षति का आकलन करें

और 42 दिनों के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट एनजीटी को सौंपें।

रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि—

  • कितने वाहन जब्त किए गए
  • कितने चालान कटे
  • कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई
  • कितनी रॉयल्टी का नुकसान हुआ

पर्यावरणीय नुकसान पर विशेष चिंता

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि—

  • रेत खनन से नदियों का संतुलन बिगड़ता है
  • तटों का कटाव बढ़ता है
  • जलचर जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ता है
  • भविष्य में बाढ़ और सूखे का खतरा बढ़ता है

इसलिए अवैध खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि पर्यावरणीय अपराध भी है।


प्रशासन में मचा हड़कंप

एनजीटी के आदेश के बाद—

  • खनन विभाग ने जिलों से तात्कालिक रिपोर्ट मंगाई
  • कई घाटों पर अचानक छापेमारी तेज की गई
  • अवैध भंडारण स्थलों की जांच शुरू हुई
  • वाहन चेकिंग अभियान तेज किया गया

सूत्रों के अनुसार कुछ अफसरों की भूमिका पहले से संदेह के घेरे में है।


स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

नदी किनारे बसे ग्रामीणों ने कहा कि—

  • वर्षों से अवैध खनन हो रहा है
  • शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती
  • रात में दर्जनों ट्रक रेत लेकर निकलते हैं
  • नदी का जलस्तर तेजी से गिर रहा है

लोगों को उम्मीद है कि एनजीटी की सख्ती से अब ठोस कार्रवाई होगी।


क्या हो सकती है कार्रवाई?

यदि जांच में—

  • अफसरों की मिलीभगत साबित होती है
  • जानबूझकर लापरवाही सामने आती है

तो—

  • विभागीय कार्रवाई
  • निलंबन
  • जुर्माना
  • और आपराधिक केस भी दर्ज हो सकता है।

निष्कर्ष

एनजीटी की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी मानी जा रही है। आने वाले 42 दिन तय करेंगे कि प्रशासन इस चुनौती को कितनी गंभीरता से लेता है और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कितनी ईमानदारी दिखाई जाती है।

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