रायपुर डेंटल कॉलेज में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर छात्रों की तालाबंदी, ओपीडी और इलाज ठप, छह दिन से शांतिपूर्ण आंदोलन अब उग्र।
रायपुर। राजधानी रायपुर के शासकीय डेंटल कॉलेज में बीते छह दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे पीजी और इंटर्न छात्रों का आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। शुक्रवार को छात्रों ने कॉलेज परिसर में तालाबंदी कर दी, जिससे ओपीडी और सभी प्रकार का दंत उपचार पूरी तरह ठप हो गया। इस अचानक लिए गए कदम से सैकड़ों मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा।
छात्र लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन द्वारा इसे सिरे से खारिज किए जाने के बाद उनमें भारी नाराजगी देखी जा रही है।
शांतिपूर्ण आंदोलन से तालाबंदी तक
डेंटल कॉलेज के पीजी और इंटर्न छात्र पिछले छह दिनों से—
- काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे
- विभागीय अधिकारियों से बातचीत कर रहे थे
- ज्ञापन और आवेदन सौंप चुके थे
लेकिन जब शासन स्तर से स्पष्ट कर दिया गया कि स्टाइपेंड बढ़ाने पर हर साल 1.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा, इसलिए फिलहाल मांग स्वीकार नहीं की जा सकती, तब छात्रों का धैर्य टूट गया।
शुक्रवार सुबह छात्रों ने ओपीडी, विभागों और प्रशासनिक भवनों में तालाबंदी कर दी।
इलाज पूरी तरह ठप, मरीज परेशान
तालाबंदी के कारण—
- ओपीडी सेवाएं बंद
- इमरजेंसी डेंटल ट्रीटमेंट प्रभावित
- सर्जरी और रूट कैनाल जैसी प्रक्रियाएं स्थगित
- दूर-दराज से आए मरीज लौटने को मजबूर
कई मरीजों ने बताया कि वे सुबह 6 बजे से लाइन में थे, लेकिन तालाबंदी की सूचना मिलने के बाद उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा।
छात्रों की मुख्य मांगें
छात्रों का कहना है कि—
- मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों को ज्यादा स्टाइपेंड मिलता है
- डेंटल छात्रों का कार्यभार उतना ही अधिक है
- महंगाई के दौर में मौजूदा स्टाइपेंड अपर्याप्त है
- अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में राशि काफी कम है
छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, उन्होंने केवल सम्मानजनक वृद्धि की मांग की थी, लेकिन शासन ने पूरी तरह मना कर दिया।
शासन का पक्ष
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि—
- स्टाइपेंड बढ़ाने से हर साल 1.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा
- वर्तमान बजट में इसका प्रावधान नहीं है
- भविष्य में वित्तीय स्थिति के अनुसार विचार किया जाएगा
हालांकि छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ आश्वासन है, ठोस समयसीमा नहीं।
कॉलेज प्रशासन की चिंता
कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि—
- मरीजों का इलाज प्रभावित होना चिंताजनक है
- छात्रों से बार-बार संवाद की कोशिश की जा रही है
- शासन स्तर पर समाधान निकालने का प्रयास जारी है
लेकिन फिलहाल स्थिति गतिरोध की बनी हुई है।
आगे क्या?
छात्रों ने चेतावनी दी है कि—
- जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा
- तालाबंदी और काम बंद आंदोलन जारी रहेगा
- जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सरकारी दंत चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
निष्कर्ष
डेंटल कॉलेज का यह आंदोलन केवल स्टाइपेंड का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और युवा डॉक्टरों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है। शासन और छात्रों के बीच शीघ्र संवाद ही इस संकट का समाधान निकाल सकता है।

