डेंटल पीजी और इंटर्न छात्रों की स्टायपेंड बढ़ाने की मांग पर शासन ने इनकार किया, 1.40 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त भार को वजह बताया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय डेंटल कॉलेजों में पढ़ रहे पीजी और इंटर्न छात्रों को स्टायपेंड बढ़ाने की मांग पर बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने यह मांग फिलहाल खारिज कर दी है। शासन का कहना है कि स्टायपेंड में वृद्धि करने से हर साल लगभग 1.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, जिसे वर्तमान बजट में वहन करना संभव नहीं है।
यह मामला हाल ही में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में उठा था, जहां छात्रों की मांग पर विस्तार से चर्चा की गई।
क्या है छात्रों की मांग
डेंटल पीजी और इंटर्न छात्र लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि—
- उनका स्टायपेंड मेडिकल पीजी छात्रों के बराबर किया जाए
- वर्तमान में मिलने वाली राशि महंगाई और बढ़ते खर्चों के मुकाबले बेहद कम है
- अस्पतालों में वे नियमित ड्यूटी, इमरजेंसी सेवा और क्लिनिकल कार्य करते हैं
छात्रों का तर्क है कि समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू होना चाहिए।
वर्तमान स्टायपेंड व्यवस्था
सूत्रों के अनुसार—
- डेंटल इंटर्न को वर्तमान में लगभग 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह स्टायपेंड मिलता है
- डेंटल पीजी छात्रों को 20 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह के आसपास भुगतान किया जाता है
- जबकि मेडिकल पीजी छात्रों को इससे कहीं अधिक स्टायपेंड मिलता है
इसी अंतर को खत्म करने की मांग छात्र कर रहे थे।
शासन ने क्यों किया इनकार
स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि—
- प्रदेश के सभी शासकीय डेंटल कॉलेजों में सैकड़ों पीजी और इंटर्न छात्र अध्ययनरत हैं
- स्टायपेंड बढ़ाने पर प्रति वर्ष 1.40 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त व्यय आएगा
- वर्तमान वित्तीय स्थिति में यह भार वहन करना कठिन है
इसी आधार पर शासन ने फिलहाल प्रस्ताव को स्वीकृति देने से इनकार कर दिया।
छात्रों में नाराजगी
सरकार के इस फैसले से डेंटल छात्रों में गहरी नाराजगी है। छात्रों का कहना है कि—
- वे अस्पतालों में पूर्णकालिक सेवा देते हैं
- पढ़ाई के साथ-साथ मरीजों की जिम्मेदारी भी निभाते हैं
- कम स्टायपेंड के कारण रहने, भोजन और पढ़ाई का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है
कुछ छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि मांग पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो वे
संघर्ष और आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
तुलना का मुद्दा बना बड़ा सवाल
छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि—
- मेडिकल और डेंटल दोनों छात्र एक ही स्वास्थ्य तंत्र का हिस्सा हैं
- दोनों की ड्यूटी, जिम्मेदारी और समय लगभग समान है
- फिर स्टायपेंड में इतना बड़ा अंतर क्यों रखा गया है?
यह मुद्दा अब स्वास्थ्य शिक्षा में समानता की बहस का विषय बन गया है।
सरकार ने छोड़ा भविष्य का रास्ता खुला
हालांकि शासन ने यह भी कहा है कि—
- भविष्य में बजट स्थिति सुधरने पर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जा सकता है
- फिलहाल इसे लंबित रखा गया है, स्थायी रूप से खारिज नहीं किया गया
इस बयान से छात्रों को थोड़ी उम्मीद जरूर मिली है।
निष्कर्ष
डेंटल पीजी और इंटर्न छात्रों की स्टायपेंड बढ़ाने की मांग पर—
- सरकार ने फिलहाल आर्थिक कारणों से इनकार कर दिया है
- 1.40 करोड़ रुपये के वार्षिक अतिरिक्त भार को मुख्य वजह बताया गया है
- लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में स्वास्थ्य शिक्षा नीति का अहम विषय बन सकता है
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार
कब और किस रूप में इस मांग पर दोबारा विचार करती है।

