रायपुर के आत्मानंद स्कूलों में बिजली के लिए बजट नहीं, 21 स्कूलों पर 50 लाख रुपए बकाया, एक स्कूल का कनेक्शन काटा, पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की बहुचर्चित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना एक बार फिर अव्यवस्थाओं के कारण सवालों के घेरे में है। राजधानी रायपुर के आत्मानंद स्कूलों में बिजली भुगतान के लिए बजट आवंटन नहीं होने से गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि 21 आत्मानंद स्कूलों पर लगभग 50 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया हो चुका है। बकाया राशि नहीं चुकाए जाने के कारण एक स्कूल का बिजली कनेक्शन काट दिया गया, जिससे शिक्षण कार्य पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
महीनों से लंबित है बिजली बिल
जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में संचालित आत्मानंद स्कूलों को नियमित बिजली बिल भुगतान के लिए कोई स्थायी बजट व्यवस्था नहीं दी गई है। स्कूल प्रबंधन कई महीनों से अस्थायी समाधान के भरोसे चल रहे थे, लेकिन अब बकाया राशि बढ़ने के बाद बिजली विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक—
- 21 आत्मानंद स्कूलों पर बिजली बिल बकाया
- कुल राशि 50 लाख रुपए से अधिक
- कुछ स्कूलों पर 2 से 5 लाख रुपए तक का व्यक्तिगत बकाया
एक स्कूल का कनेक्शन काटा, बाकी पर खतरा
बिजली विभाग ने भुगतान नहीं होने पर राजधानी के एक आत्मानंद स्कूल का कनेक्शन काट दिया है। इसके अलावा अन्य स्कूलों को भी डिस्कनेक्शन नोटिस जारी किए गए हैं। यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो और स्कूलों की बिजली कट सकती है।
इससे स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, डिजिटल बोर्ड और कार्यालयीन कामकाज पूरी तरह ठप होने की आशंका है।
पढ़ाई पर सीधा असर
बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है—
- स्मार्ट बोर्ड और प्रोजेक्टर बंद
- कंप्यूटर क्लास नहीं लग पा रही
- पंखे और लाइट नहीं चलने से कक्षाओं में परेशानी
- पेयजल और शौचालय व्यवस्था प्रभावित
एक शिक्षक ने बताया,
“आत्मानंद स्कूलों को मॉडल स्कूल बताया जाता है, लेकिन बिना बिजली के आधुनिक शिक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती।”
अभिभावकों में नाराजगी
मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार अंग्रेजी माध्यम और आधुनिक शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे शिक्षा विभाग के खिलाफ आंदोलन करेंगे।
शिक्षा विभाग की सफाई
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि—
“बिजली बिल भुगतान को लेकर तकनीकी और बजटीय समस्या आई है। जल्द ही राशि जारी कर दी जाएगी, ताकि स्कूलों में किसी प्रकार की असुविधा न हो।”
हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब योजना वर्षों से चल रही है, तो बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए बजट की स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना पहले भी कई बार विवादों में रही है—
- भवन किराया भुगतान में देरी
- सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की कमी
- स्टाफ और संसाधनों की कमी
अब बिजली संकट ने योजना की व्यवस्थाओं पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि—
“किसी भी स्कूल की आधारभूत जरूरतों में बिजली सबसे जरूरी है। यदि इसके लिए बजट नहीं है, तो योजना की सफलता पर गंभीर सवाल उठते हैं।”
निष्कर्ष
रायपुर के आत्मानंद स्कूलों में बिजली संकट सरकार की शिक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन की पोल खोल रहा है। यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और स्कूलों की विश्वसनीयता पर पड़ेगा।

