छत्तीसगढ़ में 5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा मार्च में होगी। एक्सपर्ट द्वारा पेपर तैयार होगा। 33% से कम अंक पर छात्रों को छुट्टियों में सुधारात्मक कक्षाएं लगेंगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आगामी मार्च माह में 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इस बार परीक्षाओं के प्रश्नपत्र विषय विशेषज्ञों (एक्सपर्ट) के माध्यम से तैयार कराए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षणिक समझ का आकलन किया जा सके।
शिक्षा विभाग के अनुसार, जिन विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में 33 प्रतिशत से कम अंक आएंगे, उन्हें असफल नहीं माना जाएगा, लेकिन ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान विशेष सुधारात्मक कक्षाओं (रीमेडियल क्लासेस) में शामिल होना अनिवार्य होगा।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
राज्य सरकार का मानना है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर मजबूत शैक्षणिक नींव तैयार करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा प्रणाली को और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया है।
- प्रश्नपत्र अब स्थानीय स्तर पर नहीं
- विषय विशेषज्ञों की टीम द्वारा
- निर्धारित सिलेबस और लर्निंग आउटकम के आधार पर तैयार होंगे
इससे पेपर की गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकेगी।
मार्च में होगी बोर्ड परीक्षा
शिक्षा विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार—
- 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा मार्च 2026 में आयोजित होगी
- परीक्षा राज्यभर में एक समान पैटर्न पर होगी
- मूल्यांकन प्रक्रिया भी केंद्रीकृत तरीके से की जाएगी
इससे छात्रों के प्रदर्शन की तुलना और शैक्षणिक स्तर का आकलन आसान होगा।
33% से कम अंक पर सुधारात्मक कक्षाएं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि—
- 33% से कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों को
- गर्मी की छुट्टियों में
- विशेष शिक्षण सहायता दी जाएगी
इन सुधारात्मक कक्षाओं में—
- कमजोर विषयों पर विशेष फोकस
- अतिरिक्त अभ्यास
- व्यक्तिगत मार्गदर्शन
प्रदान किया जाएगा, ताकि छात्र अगली कक्षा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
फेल नहीं होंगे छात्र
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा का उद्देश्य बच्चों को फेल करना नहीं, बल्कि सीखने की कमियों की पहचान करना है। इसलिए—
- छात्रों को डिटेन नहीं किया जाएगा
- बल्कि उनकी कमजोरियों को दूर करने का अवसर दिया जाएगा
यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप मानी जा रही है।
शिक्षकों को भी मिलेगा मार्गदर्शन
इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा—
- मूल्यांकन प्रक्रिया की समझ
- लर्निंग गैप की पहचान
- सुधारात्मक शिक्षण तकनीक
इससे शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित न रहकर मार्गदर्शक की होगी।
अभिभावकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
कुछ अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा कि इससे बच्चों की पढ़ाई को गंभीरता मिलेगी। वहीं कुछ का मानना है कि बोर्ड परीक्षा का दबाव कम उम्र के बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।
हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि परीक्षा को बोझ नहीं बल्कि सीखने का माध्यम बनाया जाएगा।
शिक्षा विभाग का बयान
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि—
“इस व्यवस्था का मकसद बच्चों को डराना नहीं, बल्कि उनकी शैक्षणिक स्थिति को समझकर समय रहते सुधार करना है। विशेषज्ञों द्वारा तैयार प्रश्नपत्र से पढ़ाई का स्तर भी सुधरेगा।”
भविष्य की तैयारी
सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में—
- डिजिटल मूल्यांकन
- विषयवार रिपोर्ट कार्ड
- छात्र प्रगति ट्रैकिंग सिस्टम
भी लागू किया जाए, जिससे शिक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सके।
निष्कर्ष
5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर सरकार का यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह बच्चों के भविष्य के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

