SIR अभियान में पुरानी मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद दस्तावेज न होने से लोग परेशान, हजारों मतदाताओं के नाम कटने की आशंका।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची को लेकर बड़ी परेशानी सामने आ रही है। हजारों ऐसे मतदाता हैं, जिनका नाम पुरानी मतदाता सूची में दर्ज है, लेकिन उनके पास अब आवश्यक सपोर्टिंग दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में वे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या बरकरार रखने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
📋 क्या है समस्या की जड़?
चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की शुद्धता के लिए SIR अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक मतदाता से पहचान और पते से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
समस्या तब उत्पन्न हो रही है जब—
- बुजुर्गों के पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं
- वर्षों पहले बने वोटर आईडी के साथ अब कोई अन्य प्रमाण नहीं बचा
- कई लोगों के दस्तावेज स्थानांतरण, आगजनी या बाढ़ जैसी आपदाओं में नष्ट हो चुके हैं
👥 बुजुर्ग और गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
विशेष रूप से—
- वृद्ध मतदाता
- ग्रामीण क्षेत्र के निवासी
- शहरी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग
इन वर्गों के लोगों के पास न तो जन्म प्रमाण पत्र, न ही स्थायी निवास प्रमाण उपलब्ध हैं। ऐसे में उनका नाम हटने की आशंका लगातार बढ़ रही है।
🏢 कार्यालयों के चक्कर, फिर भी समाधान नहीं
प्रभावित मतदाताओं का कहना है कि—
- वे कई बार बीएलओ और निर्वाचन कार्यालय गए
- हर बार नए दस्तावेजों की मांग की जाती है
- स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी के कारण भ्रम बना हुआ है
कुछ मामलों में पुराने वोटर आईडी या मतदाता पर्ची को पर्याप्त नहीं माना जा रहा, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।
⚠️ नाम कटने का डर
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों की पुष्टि नहीं होने पर नाम हटाया जा सकता है। इससे हजारों लोगों को यह डर सता रहा है कि वे आगामी चुनावों में मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
🗣️ सामाजिक संगठनों ने उठाई आवाज
कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि—
- पुरानी मतदाता सूची को प्राथमिक प्रमाण माना जाए
- बुजुर्गों और गरीबों के लिए विशेष छूट दी जाए
- वैकल्पिक सत्यापन व्यवस्था लागू की जाए
🏛️ प्रशासन की अपील
प्रशासन का कहना है कि—
- मतदाता परेशान न हों
- बीएलओ से संपर्क कर उपलब्ध दस्तावेजों की जानकारी लें
- किसी भी स्थिति में अंतिम तिथि से पहले आवेदन अवश्य करें
🔍 आगे क्या?
यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो—
- बड़े पैमाने पर नाम कटने की संभावना
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल
- प्रशासन और चुनाव आयोग पर दबाव
अब जरूरत है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए SIR प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।

